मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों का प्रचार खत्म हो गया है। अब मतदान संपन्न होने तक सुरक्षा और शांति की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर आ गई है।
प्रदेश के 4,66,09,024 मतदाता सोमवार को 53,896 मतदान केंद्रों पर मताधिकार का प्रयोग करेंगे। अब कुल उम्मीदवार 2,563 मैदान में हैं। मेहगांव सीट पर सबसे ज्यादा 32 उम्मीदवार मैदान में हैं।
कुल 230 सीटों में से 2008 में 152 सीटें जीतने वाली भाजपा के पास सत्ता को बरकरार रखने की चुनौती है तो कांग्रेस के पास अपनी पिछली 65 सीटों को बढ़ाकर बहुमत तक लाने की।
संघर्ष तगड़ा है और मतदाता का मूड भांपना आसान नहीं है। जहां शिवराज सरकार के कई दिग्गजों की सांसें अटकी हुई हैं, वहीं कांग्रेस के कई बड़े नेता भी आशंकित नजर आ रहे हैं।
मध्य प्रदेश में सीआरपीएफ की 548 कंपनियां और एसएएफ की 52 कंपनियां तैनात कर दी गई हैं। बालाघाट व सिंगरौली में नक्सलियों का प्रभाव है, इसलिए हेलिकाप्टर से निगरानी रखी जाएगी।
राज्यभर में 70,959 इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लगाया गया है।
राज्य के 51 जिलों में से 28 जिलों को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माना जाता है, 2 जिलों बालाघाट और सिंगरौली को नक्सली प्रभावित माना जाता है।
भिंड, ग्वालियर, मुरैना जिलों में हथियारों के सबसे ज्यादा लाइसेंस हैं। वहां हिंसा का अंदेशा हर चुनाव में रहता है। चुनाव आयोग के लिए वहां बिना किसी बड़ी घटना के चुनाव संपन्न कराना चुनौती होगी।
मौजूदा चुनाव में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की 34 और मालवा की 37 सीटों पर भाजपा का सारा दारोमदार है, वहीं कांग्रेस महाकौशल, रीवा-सीधी-सतना पर काफी ध्यान दे रही है।