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66 वर्षीय मां को सताने पर दौलतमंद बेटों को मिली कड़ी सजा, सुनते ही हुआ गलती का अहसास

Tue, 14 Aug 2018 10:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
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old age home
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मां को सताना बेटों को इतना महंगा पड़ जाएगा इसका अंदाजा उनको भी नहीं था। दरअसल एक 66 वर्षीय श्यामा देवांगन को सताने की सजा बेटों को कुछ यूं मिली की उन्हें वृद्धाश्रम में अपनी सेवाएं देनी होंगी। इसके लिए तीनों बेटों को माह में एक दिन आश्रम में बिताना होगा। ताकि उन्हें वहां के जीवन के बारे में पता चल सके, कि दुख और पीड़ा किसे कहते हैं। यही नहीं इसके लिए उन्हें इसके प्रमाण एसडीएम गोविंदपुरा कार्यालय में भी जमा करने होंगे।  

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यह आदेश सोमवार को एसडीएम मुकुल गुप्ता ने सुनाया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि तीनों बेटों को भले ही उनकी मां ने माफ कर दिया हो लेकिन समाज और कानून में उन्होंने अपराध किया है जिसकी सजा उन्हें चुकानी होगी। बेटों को 5-5 हजार रुपए भी प्रति माह श्यामा देवांगन के खाते में जमा करने होंगे। साथ ही कहा कि उन्हें इसका सख्ती से पालन करना होगा नहीं करने पर जेल भेज दिया जाएगा। 

बता दें कि बेटों ने अपनी मां को घर से निकाल दिया था। इसके बाद वह भोपाल के एमपी नगर एक होटल में रह रही थीं। इसके बाद उन्होंने यहां से कानूनी लड़ाई लड़ी। जिसके बाद उन्हें यह हक मिला है। और वह अब सम्मान के साथ अपने घर में रह सकेंगी। इससे पहले मां 15 साल से डीजीएम बेटे के साथ रही थी।
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श्यामा देवांगन ने प्रॉपर्टी में हिस्सा नहीं मिलने पर दो दिन पहले ही गोविंदपुरा एसडीएम कोर्ट में केस दायर किया था। एलआईजी ए-सेक्टर सोनागिरी निवासी श्यामा के पति जीएस देवांगन भेल में फोरमैन थे। 1999 में उनकी मौत हुई थी, महिला के तीन बेटे हैं। इममें एक बेटा दीपक देवांगन चार्टर्ड अकाउंटेंट है। दूसरा बेटा भेल में डीजीएम है जो दिल्ली में रहता है। वहीं तीसरा बेटा प्रकाश बेंगलुरू में रहता है। 

महिला ने आरोप लगाया था कि अरुण और उसकी पत्नी युगांक्षी ने उनका 10 तोला सोने के जेवर और आधा किलो चांदी अपने पास रख लिए थे। इसके बाद उन्हें घर से बेदखल कर दिया। जबकि तीनों बेटों के पास पर्याप्त दौलत है। इसके बाद अब मामला बढ़ा तो बेटों को अपनी गलती का अहसास हुआ। 

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