कांग्रेस ने व्यापमं घोटाले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेर रखा है, वहीं पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने भोपाल में डेरा डाल लिया है।
उन्होंने मध्य प्रदेश्ा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि जांच की प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए सीबीआई को जांच सौंपी जानी चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने कहा है, "उनके कार्यकाल से लेकर उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान की गई नियुक्तियों की जांच कराई जाए।"
'सीबीआई जांच की मांग'
दिग्विजय ने यह मांग भी की है कि उनके कार्यकाल में दी गई लीजों और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में दी गई सारी लीजों की जांच भी कराएं।
दिग्विजय सिंह ने कहा, "जांच का काम सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए और सीबीआई उसी तरह विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाए जैसे काले धन की जांच के लिए बनाया गया है। प्रांत से बाहर के पुलिस अधिकारी पूरी सूचनाएं उन्हें सौंपनी चाहिए।"
दिग्विजय ने बताया कि पत्र में उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति की है कि जब एसटीएफ की जांच की निगरानी माननीय न्यायालय कर रहा है तो पुलिस महानिदेशक ने अधिकारियों की बैठक क्यों बुलाई। क्या यह जांच को प्रभावित करने का काम नहीं है? इसी तरह डीजीपी महोदय ने यह बयान क्यों दिया कि आरएसएस के लोग इसमें शामिल नहीं हैं। जबकि सुरेश सोनी से पूछताछ की जानी चाहिए थी।
अब तक की जांच पर उठाए सवाल
दिग्विजय ने कहा, "मुख्यमंत्री ने विदेश से लौटने के बाद अधिकारियों की बैठक ली, क्या यह दबाव डालने का काम नहीं है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मुख्य न्यायाधीश पूरे मामले को अपनी नजर में लेंगे।"
दिग्विजय ने एसटीएफ पर सवाल खड़ा किया कि पूरे घोटाले के मास्टरब्रेन सुधीर शर्मा को दो बार बुलाकर पूछताछ की गई लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया गया, अब उस पर 5,000 रुपए का ईनाम घोषित किया है, जिसकी संपत्ति आयकर विभाग ने करीब साढ़े चार करोड़ रुपए आंकी थी।