धार जिला अस्पताल की 12 बेड की आईसीयू विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रही है। क्रिटिकल केयर, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों की नियमित उपलब्धता नहीं है। हर साल करीब एक हजार गंभीर मरीजों को उपचार के लिए इंदौर रेफर किया जाता है।
आदिवासी अंचल के 25 लाख से अधिक आबादी वाले धार जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) गंभीर मरीजों के लिए अपेक्षित जीवनरक्षक सुविधा साबित नहीं हो पा रही है। आईसीयू में क्रिटिकल केयर सहित विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण दुर्घटना और गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर रेफर करना पड़ रहा है। अस्पताल में अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में मरीजों को इनका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिला अस्पताल में फिलहाल 12 बेड की आईसीयू यूनिट संचालित है। इसके संचालन की जिम्मेदारी तीन एमडी मेडिसिन डॉक्टरों के भरोसे है। डॉक्टरों की ड्यूटी 10-10 दिन के शेड्यूल में लगाई जाती है। नियमित समय में सुबह 7 से दोपहर 2 बजे और शाम 5 से 7 बजे तक डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं। इसके बाद गंभीर स्थिति में डॉक्टरों को ऑन कॉल बुलाया जाता है।
मशीनें मौजूद, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
अस्पताल में टीएमटी और इको जैसी हृदय संबंधी जांच की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञों की नियमित उपलब्धता नहीं है। क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञ भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों के उपचार, वेंटिलेटर प्रबंधन और जटिल मामलों में निर्णय लेने की जिम्मेदारी उपलब्ध चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर निर्भर रहती है।
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12 बेड से आगे नहीं बढ़ रही व्यवस्था
25 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में गंभीर मरीजों की संख्या को देखते हुए आईसीयू में बेड बढ़ाने की जरूरत है। हालांकि, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण अस्पताल प्रशासन वर्तमान में 12 बेड की क्षमता के साथ ही यूनिट संचालित कर रहा है। ऐसे में सवाल है कि जब मौजूदा बेड पर ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है, तो क्षमता बढ़ाने के साथ मरीजों की निगरानी और उपचार व्यवस्था कैसे मजबूत होगी।
आईसीयू में ये प्रमुख कमियां
इनका कहना है
डॉ. मुकुंद बर्मन, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल