बाल रूप में हनुमान जी
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तीन अवस्थाओं में होते हैं दर्शन
मंदिर के पुजारी निरंजनदास वैष्णव महंत ने बताया कि उनका परिवार सन् 1126 से मंदिर की सेवा कर रहा है। यह उनकी 35वीं पीढ़ी है, जो इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। उनके अनुसार, यह प्रतिमा पांडवकालीन मानी जाती है और हजारों वर्षों से यहां स्थापित है। इस प्रतिमा की एक विशेषता यह भी है कि भक्तों को एक ही दिन में तीन रूपों में दर्शन होते हैं। प्रातःकाल में बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था के रूप में। प्रतिमा के बाएं पैर के नीचे अहिरावण की आराध्य देवी भी विराजमान हैं।