धार की ऐतिहासिक भोजशाला में शुक्रवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। हाईकोर्ट के फैसले और एएसआई की नई गाइड लाइन के बाद करीब 721 साल में पहली बार ऐसा हुआ, जब शुक्रवार को हिंदू समाज ने भोजशाला परिसर में पूरे दिन पूजा-अर्चना की। 42 डिग्री की भीषण गर्मी के बावजूद सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा और पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया।
पहले एएसआई की व्यवस्था के तहत शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज अदा की जाती थी, लेकिन इस बार शुक्रवार को भोजशाला में नमाज नहीं हुई। वहीं मुस्लिम समाज ने प्रशासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए मोहल्लों की मस्जिदों और घरों में जुमे की नमाज अदा की। प्रशासन की सूझबूझ और दोनों पक्षों की संवेदनशीलता के चलते पूरे शहर में शांति और सौहार्द का माहौल बना रहा।
मां वाग्देवी की पूजा से शुरू हुआ दिन
सूर्योदय के साथ ही भोजशाला में दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हो गया। भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने मां वाग्देवी का विधि-विधान से पूजन किया। मां वाग्देवी को चुनरी ओढ़ाई गई, पुष्प अर्पित किए गए और गर्भगृह को फूलों से सजाया गया। सुबह आरती के बाद दिनभर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने भोजशाला पहुंचकर मां वाग्देवी के दर्शन किए और इस ऐतिहासिक पल को यादगार बताया।
दिनभर लगा श्रद्धालुओं का तांता
महाआरती और वैदिक मंत्रों से भक्तिमय हुआ परिसर
शुक्रवार सुबह से ही श्रद्धालुओं और हिंदू समाज के लोगों में भारी उत्साह दिखाई दिया। तय समय पर लोग भोजशाला परिसर पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा शुरू हुई। दोपहर में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
महाआरती के बाद छोटे मुरारी बापू ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि वर्षों के संघर्ष के बाद अब भोजशाला समाज को मिली है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान अत्याचार हुए, लेकिन अब समाज एकजुट हो चुका है और मंदिर के खिलाफ किसी भी षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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बलिदानियों के परिवारों का हुआ पाद पूजन
भोजशाला आंदोलन के दौरान वर्ष 2003 में हुए लाठीचार्ज और गोलीबारी में जान गंवाने वाले हिंदू युवकों को याद करते हुए उनके परिवारजनों का सम्मान किया गया। अखंड ज्योति मंदिर के पास छोटे मुरारी बापू और बलिदानियों के स्वजनों का पाद पूजन किया गया।
इस दौरान जय श्रीराम और राजा भोज के जयकारों से पूरा मोतीबाग चौक गूंज उठा। महिलाओं के चरण पूजन कर उन्हें सम्मानित किया गया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं को ज्योति मंदिर से 50 कदम दूर एकत्रित होने की अनुमति दी थी, जिसके बाद सभी लोग एकजुट होकर भोजशाला पहुंचे।
छोटे मुरारी बापू
मुक्ति अभी अधूरी है
शाम को मां वाग्देवी की संध्या आरती भी की गई। इस दौरान गोपाल शर्मा ने कहा कि भोजशाला की मुक्ति अभी अधूरी है। जब तक भोजशाला का स्वरूप राजा भोज के काल जैसा नहीं हो जाता, तब तक सत्याग्रह जारी रहेगा।
मुख्य याचिकाकर्ता भी पहुंचे भोजशाला
भोजशाला मामले के मुख्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी भी लखनऊ से धार पहुंचे। उन्होंने शुक्रवार को पूजा में भाग लेकर मां वाग्देवी के दर्शन किए। तिवारी ने कहा कि अभी लड़ाई बाकी है और भोजशाला परिसर में मौजूद हिंदू प्रतीकों और प्रतिमाओं को सम्मान दिलाने के लिए आगे भी प्रयास जारी रहेंगे।
मुस्लिम समाज ने घरों में पढ़ी नमाज
मुस्लिम समाज ने घरों और मस्जिदों में पढ़ी नमाज
हाईकोर्ट के फैसले और एएसआई की नई गाइड लाइन के चलते मुस्लिम समाज के लोग इस बार भोजशाला नहीं पहुंचे। शहर काजी और सदर की अपील के बाद लोगों ने अपने-अपने मोहल्लों और घरों में जुमे की नमाज अदा की।
कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने भी घर पर ही नमाज पढ़ी। विरोध स्वरूप मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में कई व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं और कुछ युवाओं ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। मुस्लिम समाज का कहना है कि वह अब सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है और आगामी जुमे से पहले अदालत से कोई दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद कर रहा है।