304 करोड़ के कारम बांध के क्षतिग्रस्त होने के मामले में कमेटी ने अपनी रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव एसएन मिश्रा को सौंप दी है। रिपोर्ट में सामने आया है कि बांध रिपोर्ट करने वाली एजेंसी ने स्पेशिफिकेशन का ध्यान रखे बिना ही बांध तैयार किया। एजेंसी ने 210 दिन में खड़े होने वाले स्ट्रक्चर को 90 दिन में ही खड़ा कर दिया। बांध की क्षमता 45 एमसीएम थी। इसमें 15 एमसीएम पानी भरने के बाद ही रिसाव शुरू हो गया। बांध की दीवार के बीच में काली मिट्टी डालना था और इसके दोनों साइट पत्थर और मुरम से कवर करना था। लेकिन काली मिट्टी में भी पत्थर मिला दिया गया। इससे बांध में पानी भरने पर रिसाव शुरू हो गया।
बता दें बाध से रिसाव होने के बाद 11 अगस्त से ही प्रशासन अलर्ट हो गया था। बांध के फूटने की आशंका को देखते हुए 18 गांवों को खाली कराया गया था। इसके बाद बांध में बायपास चैनल बनाकर पानी को निकाला गया। इस मामले में शासन ने चार सदस्यीय कमेटी बनाई थी, कमेटी को पांच दिन में बांध क्षतिग्रस्त होने के कारणों पर रिपोर्ट बनाकर देने को कहा गया था। इसके बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस मामले में जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार इंजीनियरों पर कार्रवाई की जा सकती है।
जल संसाधन विभाग ने बांध का ठेका लेने वाली दिल्ली की एएनएस कंस्ट्रक्शन कंपनी और सारथी कंस्ट्रक्शन कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। साथ ही दोनों का रजिस्ट्रेशन भी निरस्त कर दिया है। बांध का निर्माण 2018 में शुरू हुआ था। इसे अगस्त 2021 में पूरा होना था, लेकिन कोरोना के कारण लेटलतीफी हुई, जिससे बांध का निर्माण अगस्त 2022 तक पूरा करने की तारीख तय हुई थी।
इधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि मिट्टी का डैम बनाया था, टूट गया। मुआवजा कब मिलेगा प्रभावितों को कुछ पता नहीं..। भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार का बांध बनाया था।