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dewas news:देवास जिले के जंगलों में भी सक्रिय हैं शिकारी, पिछले साल वनरक्षक की हुई थी हत्या, जलस्त्रोतों के आसपास बढ़ाई निगरानी

Sun, 15 May 2022 05:14 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास

सार

गुना में शिकारियों द्वारा की गई पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद अब सभी जिलों में सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं। देवास जिले के जंगलों में भी शिकारी सक्रिय हैं। पिछले साल शिकारियों ने वनरक्षक की हत्या कर दी थी।  
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देवास जिले में है सघन वन क्षेत्र - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गुना में शिकारियों द्वारा पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद से अब सरकार सख्त कदम उठा रही है। सीएम बैठकें लेकर अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं। मगर शिकारी सिर्फ गुना ही नहीं बल्कि देवास जिले में भी सक्रिय हैं। इंदौर, सीहोर, हरदा, खंडवा, खरगोन आदि जिलों के शिकारियों की सक्रियता का पूर्व में खुलासा हो चुका है तो स्थानीय शिकारी भी सक्रिय रहते हैं। वन विभाग अब चौकसी बरत रहा है।
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दरअसल देवास जिले में सघन  वन क्षेत्र है। बीते करीब एक माह में शिकार से जुड़े तीन मामले सामने आए हैं जिनमें एक नीलगाय, हिरण का शिकार किया गया। वहीं एक जगह शिकार के दौरान किसान पर शिकारियों द्वारा गोली चलाई गई। कुछ साल पहले डबलचौकी से उदयनगर की ओर जाने वाले रास्ते पर बाघ का शव संदिग्ध हालत में मिला था जिसके दांत, नाखून आदि गायब थे। पिछले साल नवंबर में उदयनगर क्षेत्र में तेंदुए के शिकार की घटना सामने आई थी जिसमें इंदौर की पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा था। जिले में हिरण, नीलगाय आदि जंगली जानवरों के शिकार की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इस दौरान गोली, तीर, करंट का उपयोग होता है। उदयनगर, पीपरी, पुंजापुरा, बागली, कांटाफोड़, सतवास, कन्नौद, हरणगांव, खातेगांव क्षेत्र के जंगलों में शिकारियों की सक्रियता अधिक बनी रहती है। गर्मी के सीजन में शिकारियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने तालाब, झील सहित अन्य जल स्रोतों के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। इसके साथ ही गश्ती और बढ़ाने की तैयारी है। शिकार की घटनाओं के मामले में वनमंडलाधिकारी पीएन मिश्रा का कहना है कि शिकारियों की सक्रियता का कोई विशेष क्षेत्र नहीं होता, विशेष रणनीति से ही इन पर अंकुश लगाया जा सकता है। हमने गुप्तचरों को सक्रिय किया है। तेज गर्मी में जानवर पानी पीने के लिए जलस्रोतों पर पहुंचते हैं, यहां पर विशेष नजर रखी जा रही है। जिले में शिकारियों का कोई नेटवर्क सक्रिय नहीं है।
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वनरक्षक की हत्या के बाद जंगल में जांच करने पहुंचे थे पुलिस अधिकारी - फोटो : सोशल मीडिया

पिछले साल हुई थी वनरक्षक की हत्या
पिछले साल फरवरी माह में देवास जिले में पुंजापुरा क्षेत्र के जंगल में वनरक्षक मदनलाल वर्मा की शिकारियों की हत्या कर दी थी। शिकारी एक जलस्रोत के समीप एकत्रित थे। वनरक्षक ने बाइक चलाते हुए उनको ललकारा था, इसी दौरान एक ने  बंदूक से फायर कर दिया था जिससे वर्मा की मौत हो गई थी। मामले में स्थानीय शिकारियों को उदयनगर पुलिस ने पकड़ा था। इसी तरह सतवास क्षेत्र में कन्नौद व अन्य जगह के शिकारियों ने नीलगाय का शिकार किया था। जंगल से लौटते समय इनको सतवास पुलिस ने नीलगाय के मांस, बंदूक सहित गिरप्तार किया था। बागली रेंज के तहत तीर से हिरण का शिकार किया गया था। इसमें स्थानीय शिकारियों के शामिल होने की बात सामने आई थी। खातेगांव क्षेत्र के गांव करोंदमाफी में नसरुल्लागंज के शिकारियों ने बंदूक से हिरण का शिकार करने का प्रयास किया था, इस दौरान एक किसान पर गोली चलाई गई थी, जिसमें किसान बाल-बाल बचा था।
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