श्री काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा।
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रधानमंत्री ने सोमवार को 700 करोड़ रुपये की लागत से 33 महीने में तैयार हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम को दुनिया को समर्पित किया। इस परिसर में इंदौर की देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देवी अहिल्याबाई का जिक्र प्रमुखता से किया, जिन्होंने करीब 250 साल पहले काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्निर्माण कराया था। ऑडियो विजुअल प्रेजेंटेशन में भी देवी अहिल्याबाई का जिक्र प्रमुखता से किया गया।
दरअसल, इंदौर की देवी अहिल्याबाई का काशी से खास नाता रहा है। उन्होंने बनारस में भव्य काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। गंगा नदी के किनारे अहिल्याबाई घाट और महल भी है, जिसे होलकर वाड़ा कहते हैं। इसका पता है- डी-18/16, जिसमें मां गंगा की दुर्लभ और अतिप्राचीन मूर्तियां रखी गई हैं। यह भवन प्राचीन धरोहर, पुरातात्विक स्थल व अवशेष अधिनियम 24, सन् 1958 के अंतर्गत संरक्षित है। इंदौर के विधायक रमेश मेंदोला ने ट्वीट किया कि "काशी विश्वनाथ की संकल्पित साधिका लोकमाता देवी अहिल्या बाई की कर्मभूमि इंदौर से काशी और सनातन धर्म को उसकी चिरप्राचीन गरिमा लौटाने के लिए संकल्पित और समर्पित राष्ट्रनायक नरेंद्र मोदी जी को नमन।" एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि इतिहास को इतिहास बताने वाले काशी धाम में सनातन धर्म की यशध्वजा फहराने वाली, सनातन शिव की आराधक, उपासक, हमारे इंदौर की लोकमाता देवी अहिल्या बाई की प्रतिमा को नमन।
250 साल पहले देवी अहिल्याबाई ने ही करवाया था निर्माण
इंदौर की रानी अहिल्याबाई होलकर ने विश्वनाथ धाम का 250 साल पहले पुनर्निर्माण करवाया था। देवी अहिल्याबाई के योगदान को याद करते हुए उनकी एक मूर्ति श्री काशी विश्वनाथ धाम में लगाई गई है। साथ ही उनके योगदान को भी दीवार पर दर्ज कराया गया है।
देवी अहिल्याबाई का रहा है काशी से करीब का नाता
देवी अहिल्याबाई होलकर ने देशभर में कई मंदिरों, घाटों का निर्माण कराया था। काशी से उनक नाता बेहद करीब का था। मुगल शासक औरंगबेज के आदेश पर 1669 में काशी विश्वनाथ मंदिर को क्षतिग्रस्त किया गया था। इसके बाद देवी अहिल्याबाई ने ही मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था। बाबा की प्राण-प्रतिष्ठा भी विधि-विधान से कराई थी।