जज्बा हो तो आसमान की ऊंचाई भी कम पड़ जाती है और हौसले की उड़ान के लिए परों की जरूरत नहीं होती।
कुछ इसी तरह का जज्बा और हौसला है मध्य प्रदेश के खंडवा की भागवत दवाड़े में, जो अपनी बेटियों से पढ़कर 12वीं की परीक्षा देने की तैयारी कर रही हैं।
गरीब परिवार से नाता रखने वाली भागवत की पढ़ाई अधूरी रह गई थी। तीन बेटियों और एक बेटे की मां भागवत आंगनबाड़ी में सहायिका के पद पर कार्यरत हैं और उनके पति विष्णु राज मिस्त्री हैं।
किसी तरह दोनों की आमदनी से परिवार गुजर-बसर कर रहा है। भागवत की बड़ी बिटिया ने इस वर्ष 12वीं की परीक्षा में 74 फीसदी अंक हासिल किए हैं और वह आगे भी पढ़ाई जारी रखना चाहती है।
वहीं उनकी दूसरी बेटी ने 10वीं में 86 फीसदी अंक हासिल किए हैं, जबकि तीसरी बेटी ने आठवीं और बेटे ने पांचवीं में अच्छे अंकों के साथ परीक्षा उत्तीर्ण की है।
बच्चों को पढ़ता देख भागवत के मन में भी पढ़ाई की इच्छा हिलोरे मारने लगी और उसमें उनकी बेटियों ने साथ दिया। 36 वर्षीय भागवत ने 10वीं की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास की है और वह अब ओपन स्कूल से 12वीं की परीक्षा देने की तैयारी कर रही हैं।
भागवत बताती हैं कि कई बार उन्हें अपने विभिन्न विषयों को समझने में दिक्कत आती है तो उनकी बेटी एक शिक्षक की तरह उसे पढ़ाती है।