ग्वालियर हाईकोर्ट ने दतिया विधायक को नोटिस थमाया
प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर सियासी और कानूनी चर्चा के केंद्र में है। कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को नामांकन पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट से नोटिस जारी होने की जानकारी सामने आई है। नोटिस के बाद दतिया की राजनीति में संभावित उपचुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मामला वर्ष 1991 में कांग्रेस के एक प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुई एफआईआर से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान घनश्याम सिंह समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। आरोप है कि दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान नामांकन पत्र दाखिल करते समय घनश्याम सिंह ने इस आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी। इसी मुद्दे को लेकर दीपक बेलपत्री समेत कुछ लोगों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। अब इसी मामले में अदालत ने विधायक घनश्याम सिंह को नोटिस जारी किया है। हालांकि सिर्फ नोटिस जारी होना आरोपों की पुष्टि नहीं करता है। मामले में अदालत की आगे की सुनवाई और अंतिम फैसला महत्वपूर्ण होगा।
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इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस प्रदेश महासचिव अवधेश नायक ने कहा कि हाईकोर्ट से नोटिस मिलना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और फिलहाल इसे बहुत बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं नायक ने बीजेपी नेता राजेंद्र भारती पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे राजेंद्र भारती की भूमिका हो सकती है। अवधेश नायक का आरोप है कि राजेंद्र भारती कानूनी दांव-पेच और दस्तावेजों के जरिए राजनीतिक नुकसान पहुंचाने में माहिर हैं। नायक ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2023 में उनका टिकट कटने के पीछे भी राजेंद्र भारती की भूमिका थी। हालांकि ये आरोप अवधेश नायक के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दतिया विधानसभा सीट की मौजूदा राजनीतिक स्थिति भी इस मामले को अहम बनाती है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद हुए हालिया उपचुनाव में बीजेपी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि कांग्रेस ने दोनों चुनावों में जीत दर्ज की। ऐसे में हाईकोर्ट के नोटिस के बाद दतिया में राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस कानूनी मामले के चलते दतिया में एक बार फिर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है? फिलहाल इसका जवाब साफतौर पर नहीं है। केवल नोटिस जारी होने से विधायक की सदस्यता खत्म नहीं होती और न ही उपचुनाव की स्थिति बनती है। इसके लिए अदालत का अंतिम फैसला और उसके बाद लागू होने वाली निर्वाचन संबंधी कानूनी प्रक्रिया निर्णायक होगी। फिलहाल दतिया की सियासत में हाईकोर्ट के नोटिस ने नया मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है। अब नजर अदालत की अगली सुनवाई और मामले में आने वाले फैसले पर रहेगी।