दतिया के जंगल में विदेशी महिला पर्यटक से सामूहिक दुष्कर्म करने वालों की उम्रकैद की सजा को ग्वालियर हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने सजा कम करने की अपील खारिज कर दी है। साथ ही कहा है कि हर बलात्कार जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है।
कोर्ट ने कहा कि यह पीड़िता के शरीर पर नहीं बल्कि उसके मन या आत्मा पर आघात या हमला है। यह उस समय और भी घिनौना कृत्य हो जाता है, जब पीड़िता विदेशी पर्यटक हो और वह आपके देश की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक, ऐतिहासिक धरोहर को देखने आई है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 13 दोषी सजा काट चुके हैं और उनकी दया याचिका को खारिज किया जाता है। ऐसे गंभीर मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।
क्या था मामला
मार्च 2013 में विदेशी कपल भारत में साइकिल यात्रा पर निकला था। 15 मार्च 2013 को वह मध्यप्रदेश के दतिया पहुंचे और यहां झरिया गांव के जंगल में हाईवे किनारे टेंट लगातर रात्रि विश्राम के लिए रुके थे। रात करीब 8 बजे छह से सात बदमाशों ने उनके कैंप पर हमला कर दिया। विदेश पर्यटक दंपती को बंधक बना लिया। बदमाशों ने विदेशी महिला के पति को बंधक बनाकर मारपीट की और विदेशी महिला से सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद उनकी साइकिल और सामान कैंप को तोड़फोड़ कर उनका कीमती सामान लूट ले गए थे। पीड़ित दंपती किसी तरह मुख्य सड़क पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से दतिया सिविल लाइन पुलिस स्टेशन पहुंचे। ट्रांसलेटर की मदद से एफआईआर दर्ज हुई। विदेशी महिला से सामूहिक दुष्कर्म की खबर से पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। मध्यप्रदेश का दतिया सुर्खियों में आ गया था। इसके बाद तत्काल पुलिस एक्शन में आई।
विदेशी महिला से दुष्कर्म मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखने का फैसला सुनाया है।
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पुलिस ने तत्काल गंभीरता से मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लूटा गया माल बरामद किया। जिस पर उनके फिंगर प्रिंट मिले थे। डीएनए रिपोर्ट कराने पर पांच आरोपियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इससे सामूहिक दुष्कर्म करने वालों की पहचान हुई थी। ट्रायल कोर्ट स्पेशल जज, दतिया ने 20 जुलाई 2013 को आरोपियों को दोषी ठहराया था। हाईकोर्ट ने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म में प्रत्येक आरोपी द्वारा अलग-अलग कृत्य सिद्ध करना आवश्यक नहीं, सामूहिक सहभागिता ही पर्याप्त है। इसके बाद सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
इस सनसनीखेज सामूहिक दुष्कर्म व लूटकांड में आरोपी रामप्रोक, विष्णु, भूटा, बृजेश उर्फ गजा और नितिन, रिशी उर्फ बाबा को सजा सुनाई गई थी। 2013 में सजा को चुनौती दी। 13 साल की सजा काट चुके हैं, लेकिन कोर्ट ने कोई राहत नहीं देते हुए याचिका खारिज कर दी है। सभी की सजा बरकरार रखी गई है।