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दतिया उपचुनाव 2026: नरोत्तम की रणनीति या कांग्रेस का स्थानीय दांव, किसे मिलेगा जनादेश? फैसला तीन अगस्त को

Tue, 28 Jul 2026 08:49 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दतिया

सार

Datia Bye Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव का प्रचार थम गया है। भाजपा ने विकास और डबल इंजन सरकार, जबकि कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी और स्थानीय मुद्दों पर वोट मांगा है। अब 30 जुलाई को मतदान होगा, जिसके बाद मतदाता तय करेंगे कि जनादेश किसके पक्ष में जाता है।

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कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दतिया विधानसभा उपचुनाव का चुनावी शोर अब थम चुका है। कई दिनों तक चली रैलियों, रोड शो, जनसभाओं और आरोप-प्रत्यारोप के बाद अब फैसला मतदाताओं के हाथ में है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी। अब नजर इस बात पर है कि किसकी रणनीति ज्यादा प्रभावी रहेगी और कौन से मुद्दे मतदाताओं को सबसे अधिक प्रभावित करेंगे।

दतिया उपचुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रतिष्ठा का चुनाव बना दिया। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव प्रचार किया। वहीं कांग्रेस की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई दिग्गज नेताओं ने मोर्चा संभाला।

भाजपा ने किस पर वोट मांगा?

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भाजपा ने अपने प्रचार अभियान में डबल इंजन सरकार, विकास कार्य, सड़क, बिजली, पानी, महिला सशक्तिकरण और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया। पार्टी ने विकास की निरंतरता के नाम पर मतदाताओं से समर्थन मांगा। दूसरी ओर कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, कानून-व्यवस्था, स्थानीय विकास और प्रशासन के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। कांग्रेस ने इस चुनाव को जनता बनाम सरकार की लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश की।

नरोत्तम मिश्रा की क्या भूमिका?
इस चुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका सबसे अधिक चर्चा में रही। दतिया उनकी राजनीतिक कर्मभूमि रही है। उन्होंने संगठन के साथ मिलकर बूथ स्तर तक चुनावी रणनीति तैयार की और कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम नायक ने स्थानीय चेहरा होने का लाभ उठाने की कोशिश की। उन्होंने गांव-गांव जनसंपर्क कर स्थानीय समस्याओं और जनभावनाओं को चुनावी अभियान का केंद्र बनाया। कांग्रेस संगठन ने भी उनके समर्थन में लगातार प्रचार अभियान चलाया।

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जातीय समीकरण कैसा?
दतिया का चुनावी गणित हमेशा से दिलचस्प रहा है। यहां कोई भी एक समाज अकेले जीत-हार तय करने की स्थिति में नहीं है, लेकिन कुछ वर्ग चुनाव परिणाम पर निर्णायक प्रभाव रखते हैं। उपलब्ध चुनावी आकलनों के अनुसार ब्राह्मण समाज की हिस्सेदारी करीब 14.8 प्रतिशत, अहिरवार-जाटव समाज की 14.7 प्रतिशत, कुशवाहा-काछी समाज की 12.2 प्रतिशत, यादव समाज की 7.4 प्रतिशत और लोधी समाज की लगभग 6.9 प्रतिशत मानी जाती है। ऐसे में एक-दो प्रतिशत वोटों का इधर-उधर होना भी मुकाबले का परिणाम बदल सकता है।

पढ़ें: 291 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा रहेगी चाक-चौबंद, हर बूथ पर CRPF की तैनाती; ड्रोन कैमरे से भी नजर

डॉ. नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं। टिकट नहीं मिलने के बाद सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समाज की नाराजगी को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ पोस्ट और वीडियो में उपेक्षा और असंतोष की बातें भी कही गईं। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इन प्रतिक्रियाओं का वास्तविक असर मतदान पर कितना पड़ेगा।

भाजपा के ब्राह्मण चेहरे का दांव
इसी बीच बीजेपी ने ब्राह्मण चेहरे के रूप में युवा नेता आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। पार्टी की रणनीति स्पष्ट है कि उम्मीदवार बदलने के बावजूद उसका पारंपरिक वोट बैंक उसके साथ बना रहे। स्थानीय राजनीतिक जानकारों और वरिष्ठ पत्रकारों की राय भी इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि नाराजगी मुख्य रूप से सोशल मीडिया तक सीमित है और मजबूत संगठन के दम पर बीजेपी इसे संभाल लेगी। वहीं कुछ विश्लेषकों का कहना है कि एक वर्ग में खामोश नाराजगी जरूर है, जिसका असर मतदान के दौरान देखने को मिल सकता है।

क्या मुकाबला एकतरफा नहीं? 
इस बार मुकाबला भी पूरी तरह एकतरफा नहीं माना जा रहा। बीजेपी के आशुतोष तिवारी के सामने कांग्रेस के उम्मीदवार के साथ आजाद समाज पार्टी से दामोदर यादव भी चुनाव मैदान में हैं। दामोदर यादव के चुनाव लड़ने से यादव समाज के वोटों का समीकरण चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे परंपरागत वोटों का बंटवारा हो सकता है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है। वहीं अहिरवार-जाटव और कुशवाहा-काछी समाज के मतदाताओं को भी इस चुनाव में अहम माना जा रहा है। इन वर्गों का रुख किस दल की ओर जाता है, यह परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया
ब्राह्मण बहुल इलाकों में बातचीत के दौरान मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। कुछ मतदाता आशुतोष तिवारी को नया और युवा चेहरा मानते हुए उन्हें मौका दिए जाने की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग डॉ. नरोत्तम मिश्रा के चुनाव मैदान में नहीं होने को लेकर असहजता भी व्यक्त करते हैं। हालांकि इन चर्चाओं के बीच अंतिम फैसला मतदाता ही करेंगे और इसका जवाब मतदान के बाद बैलेट बॉक्स से सामने आएगा।

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