दमोह जिले के हटा ब्लॉक में आने वाले बरोदा गांव में खेत में बनी एक झोपड़ी में बुधवार शाम अचानक आग लग गई, जिससे कुछ ही देर में पूरी झोपड़ी आग में घिर गई और अंदर मौजूद तीन मासूम बच्चियां बुरी तरह झुलस गईं। आग उठते देख स्थानीय लोगों ने आग बुझाई और परिजनों को सूचित किया। बच्चियों को इलाज के लिए हटा सिविल अस्पताल लाया गया, वहां से जिला अस्पताल रेफर किया गया। जहां दो की मौत हो गई है और एक की हालत गंभीर होने पर जबलपुर रेफर किया गया।
मासूम बच्चियों के पिता गोविंद आदिवासी ने बताया कि वह सागर जिले के बंडा तहसील के तारौली गांव का रहने वाला है। इस साल हटा ब्लॉक के बरोदा गांव में खेती की सिंचाई का ठेका लेकर अपने परिवार के साथ रह रहा था। शाम के समय वह खेत में प्याज की छिलाई कर रहा था। मेरी पत्नी और तीनों बेटियां झोपड़ी में मौजूद थी। कुछ देर बाद मेरी पत्नी मेरे पास आ गई, तभी अज्ञात कारणों से झोपड़ी में आग लग गई। जब हमने पलटकर पीछे देखा तो झोपड़ी आग से घिरी थी। वह और आसपास के कई लोग आग बुझाने के लिए झोपड़ी की तरफ भागे। लेकिन झोपड़ी की आग बहुत तेज हो गई और मेरी तीनों बेटियां आग में झुलस गई। जैसे-तैसे झोपड़ी की आग बुझाने के बाद बच्चों को बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल लेकर आ गए।
जिला अस्पताल के सर्जन डॉक्टर उमेश तंतुवाय ने बताया कि तीन बच्चियां झुलसी हुई अस्पताल पहुंची थी, जिनमें से जाह्नवी (पांच), कीर्ति (तीन) की मौत हो गई है। पांच महीने की हीर जिसकी हालत काफी नाजुक है, उसे जबलपुर रेफर किया गया। सूचना मिलते ही दमोह एसडीएम आरएल बागरी भी अस्पताल पहुंचे और मामले की जानकारी ली। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना का कारण अभी अज्ञात है।