मानसून की दस्तक के साथ दमोह जिले की पहाड़ियां, जंगल, नदी-नाले और जलधाराएं अपने खूबसूरत रूप में नजर आने लगी हैं। बारिश के बाद सूखे पड़े प्राकृतिक क्षेत्र हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं, वहीं पहाड़ी चट्टानों से उतरता पानी कई जगह झरनों और जलप्रपात का रूप ले लेता है। जिले के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद ये प्राकृतिक स्थल स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से आने वाले सैलानियों को भी आकर्षित कर रहे हैं।
मटककुंड में चट्टानों से उतरती जलधाराएं बना रही मनमोहक नजारा
जबेरा का मटककुंड मानसून में प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण बन जाता है। बारिश के बाद चट्टानों के बीच से उतरती जलधाराएं झरने जैसा दृश्य बनाती हैं। चारों ओर हरियाली और पानी की कल-कल यहां आने वालों को आकर्षित करती हैं। मटककुंड जबेरा से करीब 7 से 10 किलोमीटर दूर बताया जाता है। अंतिम हिस्से में कुछ दूरी पैदल तय करनी पड़ सकती है। हालांकि यहां पेयजल, शौचालय, सुरक्षा और बैठने जैसी सुविधाओं का अभाव है।
किशनगढ़ में बढ़ी सैलानियों की आवाजाही, सोशल मीडिया से बनी पहचान
तेंदूखेड़ा क्षेत्र में सेलवाड़ा-किशनगढ़ के बीच स्थित प्राकृतिक जल स्थल भी बारिश में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पहाड़, हरियाली और बहते पानी के बीच परिवार और युवाओं की आवाजाही बढ़ी है। तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा होने से उनकी पहचान भी बढ़ रही है। हालांकि पहुंच मार्ग, पार्किंग, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी महसूस होती है।
बम्हनी जलप्रपात में पहाड़ों से गिरता पानी बना आकर्षण
कुम्हारी-घाट पिपरिया के पास बम्हनी जलप्रपात बारिश में जीवंत हो उठता है। चट्टानों के बीच से नीचे गिरती जलधारा और आसपास की हरियाली मनमोहक दृश्य बनाती है। दमोह से करीब 40 किलोमीटर दूर बताए जाने वाले इस स्थल पर भी पहुंच मार्ग और पर्यटन सुविधाओं के विकास की जरूरत है।
सुनार नदी से नसेनिया फॉल तक, बदल जाता है पूरा प्राकृतिक नजारा
नरसिंहगढ़ में बारिश के बाद सुनार नदी का जलस्तर बढ़ जाता है और आसपास की हरियाली नजारे को और खूबसूरत बना देती है। सीतानगर डेम और धार्मिक स्थल भी आकर्षण बढ़ाते हैं। वहीं दमोह-छतरपुर सीमा के समीप सिलापरी का नसेनिया फॉल मानसून में शानदार दिखाई देता है। यहां प्रागैतिहासिक शैलचित्रों की मौजूदगी इसे प्राकृतिक के साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है।
खूबसूरती के साथ खतरा भी, तेज बहाव से रहें दूर
बारिश में पहाड़ी चट्टानों पर फिसलन बढ़ जाती है और नदियों-जलधाराओं में अचानक तेज बहाव आ सकता है। पर्यटकों को पानी में उतरने, गहरे हिस्सों में जाने और किनारों पर सेल्फी लेने से बचना चाहिए। बच्चों को जलस्रोतों के पास अकेला न छोड़ें।
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सुविधाएं बढ़ें तो दमोह बन सकता है बड़ा मानसून पर्यटन सर्किट
मटककुंड, किशनगढ़, बम्हनी, नरसिंहगढ़ और नसेनिया फॉल को बेहतर सड़क, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं से जोड़ा जाए तो दमोह का बड़ा मानसून पर्यटन सर्किट विकसित हो सकता है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विकास के साथ इन प्राकृतिक स्थलों के पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।