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Damoh News: नगर पालिका ने 226 भवन निर्माण आवेदन किए निरस्त, लोगों का आरोप नहीं बताया कारण

Sun, 09 Feb 2025 04:24 PM IST
दमोह ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

दमोह नगर पालिका द्वारा 226 भवन निर्माण अनुज्ञा के आवेदन बिना किसी स्पष्ट कारण के निरस्त कर दिए गए हैं, जिससे आवेदकों को बैंक लोन मिलने में परेशानी हो रही है। नियम के अनुसार 30 दिनों में अनुमति मिलनी चाहिए, लेकिन 60-60 दिन बीत जाने के बाद भी आवेदन या तो पेंडिंग रखे गए या अचानक रिजेक्ट कर दिए गए।
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दमोह नगर पालिका कार्यालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दमोह नगर पालिका के द्वारा बिना कारण बताए भवन निर्माण की अनुमति के आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं। रिकॉर्ड में 226 ऐसे आवेदन हैं, जो पहले प्रक्रिया में अटकाए रखे गए, फिर बिना किसी कारण बताए निरस्त कर दिए हैं। जबकि भवन अनुज्ञा (घर बनाने की अनुमति) देने के लिए नगर पालिका ने 30 दिन का समय रखा है, लेकिन यहां पर ऑनलाइन आवेदन करने के 60-60 दिन गुजरने के बाद भी मंजूरी नहीं मिली है।

जो आवेदन रिजेक्ट किए गए हैं, उनमें कोई खामी भी नहीं बताई है। आवेदन करने के पहले दिन ही इसकी मॉनीटरिंग प्रारंभ हो जाती है। आवेदन सीएमओ, सब इंजीनियर, कॉलोनी अधिकारी, बिल्डिंग इंस्पेक्टर और लिपिक की नजरों के सामने से ऑनलाइन गुजरता है। सभी को इसकी सूचना पहुंचती है, लेकिन इसके बाद भी आवेदनों का निराकरण नहीं किया रहा। ऐसी स्थिति में लोगों को निर्माण की अनुमति न मिलने पर नगर पालिका के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्हें बैंक लोन तक नहीं मिल रहा है।
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दरअसल नगर पालिका ने 226 भवन अनुज्ञा के आवेदन निरस्त कर दिए हैं। इनमें रिजेक्ट करने का कारण भी स्पष्ट नहीं बताया है, जबकि दो आवेदन पेंडिंग में रखे हैं और 6 आवेदन ऐसे भी हैं, जिन्हें रिटर्न किया है। इनमें से कई आवेदन 60-60 दिन पुराने भी हैं, लेकिन इनका निराकरण नहीं किया गया। स्टेट्स में रिजेक्ट का उल्लेख होने पर संबंधित व्यक्ति नगर पालिका के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिल रहा है। ऑनलाइन एप्लीकेशन में भवन निर्माण से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए भी जवाबदेही तय की गई है। इसमें यदि निर्माण की अनुमति जारी करने में देर की गई तो संबंधित स्टाफ को ऑनलाइन स्टेटस में इसका कारण नोट करना होगा और सारे दस्तावेज सही होने पर अधिकतम 30 दिनों में परमिशन देनी है। मगर यहां पर ऐसा नहीं हो रहा है।

दो माह से फाइल ऑनलाइन पेंडिंग
आवेदक अजीत जैन ने बताया कि उन्होंने भवन निर्माण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। दो माह से फाइल ऑन लाइन पेंडिंग दिख रही थी, लेकिन अब रिजेक्ट कर दी गई है। ऐसा होने से उनका बैंक लोन मंजूर नहीं हो पा रहा है। एक अन्य इंजीनियर शैलेंद्र परिहार ने बताया कि बिना कारण के आवेदन रिजेक्ट किया जा रहा है। अधिकारी कारण भी नहीं लिख रहे हैं। बैंक में बिना अनुज्ञा के कोई भी लोन स्वीकृत नहीं होता है। वे भवन का काम रोककर रखे हैं। इसी तरह की व्यथा सौरभ असाटी और अभिषेक जैन की है। दोनों का आवेदन मंजूर कर लिया गया, लेकिन बाद में उसे रिजेक्ट कर दिया है। बिना कारण के सीधे रिजेक्ट कर दिया गया।
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ये है आवेदन की प्रक्रिया
दरअसल भवन अनुज्ञा लेने के लिए मकान मालिक को पहले अपने नाम से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। आर्किटेक्ट द्वारा बनाया गया मकान का नक्शा एवं इसके निर्माण के दस्तावेज साथ लगाकर मोबाइल नंबर भी अपलोड करना होगा। एक बार रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद आप अपनी यूजर आईडी से किसी भी समय भवन अनुज्ञा के फाइल की प्रगति रिपोर्ट देख सकेंगे। इसमें परमिशन के लिए समय सीमा का भी प्रावधान है।

वसूलेंगे पांच गुना जुर्माना
नगर पालिका सीएमओ प्रदीप शर्मा का कहना है जितने भी भवन अनुज्ञा के आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं। उन सभी के कारण भी स्पष्ट हैं। उनके कंपोडिंग केस हैं, जिनमें भवन बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। लोगों ने पहले प्लाट पर 100 प्रतिशत मकान बना लिया है फिर अनुज्ञा के लिए अनुमति मांग रहे हैं। प्लाट पर 60 प्रतिशत निर्माण करने पर ही अनुमति दी जा सकती है। जिन्होंने बिना अनुमति के काम कर लिया है। उनके खिलाफ पांच गुना जुर्माना की कार्रवाई होगी।
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