दमोह शहर की पहचान यहां के घंटाघर से होती है। क्योंकि इस इमारत के चारों ओर घड़ियां लगी हैं, जो काफी समय से बंद चल रही थी। इन घड़ियों में सुधार कराने के बाद रविवार को इन्हें चालू कर इमारत पर लगाया गया है। जिससे शहरवासी भी काफी खुश हैं।
दरअसल घंटाघर चौराहे पर कुछ साल पहले बड़ी-बड़ी घड़ियां लगाई गई थी, जो लंबे समय से बंद थी। इन घड़ियों के बंद होने के कारण यहां से गुजरने वाले आम लोगों को समय का पता भी नहीं चलता था। इन बंद घड़ियों को रोटरी क्लब ने अपनी ओर से राशि खर्च कर सुधार कराकर चालू कराया। रविवार को घंटाघर के चारों ओर लगी घड़ियों को नीचे उतरवाकर उनकी मरम्मत कराई गई।
रोटरी क्लब के राकेश अहिरवार ने बताया कि क्लब की ओर से यह घड़ी घंटाघर चौराहे पर लगवाई गईं थीं, लेकिन कुछ दिन बाद बंद हो गईं। बार-बार शिकायत मिल रही थी और लोगों में भी इस बात की निराशा थी कि घड़ियां चालू नहीं हो रही। जिस पर नगरपालिका के कर्मचारी बुलाकर घड़ी नीचे उतरवाईं गई और उन्हें ठीक कराकर दोबारा चालू कराया गया है।
बता दें घंटाघर से ही दमोह शहर की पहचान मानी जाती है, क्योंकि यह इमारत बिल्कुल बीचों बीच खड़ी है। जिसके चारों ओर रास्ते हैं और यह स्थान ह्रदय स्थल के नाम से भी पहचाना जाता है। पूरा बाजार इसी घंटाघर के चारों ओर संचालित होता है। साथ ही दशहरा चल समारोह और गणेश प्रतिमा का चल समारोह का मुख्य कार्यक्रम इसी घंटाघर चौराहे पर संचालित होता है।