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Damoh News: दस साल पहले किसान ने दान में दी थी जमीन, 21 साल बाद भी नहीं बना हाईस्कूल का भवन

Tue, 13 Feb 2024 04:53 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

Damoh News: मध्य प्रदेश के दमोह में 21 साल से देवरी फतेहपुर हाईस्कूल का भवन नहीं है। दस साल पहले एक किसान ने जमीन दान दी थी। इसके बाद भी अब तक हाईस्कूल का भवन नहीं बना है। 
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दमोह में 21 साल बाद भी हाईस्कूल को बिल्डिंग नहीं मिली है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दमोह जिले के हटा विकासखंड के देवरी-फतेहपुर में 21 साल बाद भी हाईस्कूल भवन का निर्माण नहीं हो पाया है। हालत यह है कि इस स्कूल के लिए दस साल पहले गांव के एक किसान ने जमीन भी दान दी थी। इसके बावजूद स्कूल अपनी बिल्डिंग को तरस रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों का उन्नयन कर माध्यमिक स्कूल को हाईस्कूल तो बना दिया, लेकिन 21 वर्ष बीतने के बाद भी स्कूल को स्वयं का भवन उपलब्ध नहीं हो सका है।

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माध्यमिक स्कूल देवरी-फतेहपुर का उन्नयन वर्ष 2002 में हाईस्कूल देवरी-फतेहपुर के रूप में हुआ था। इस स्कूल में करीब पांच किलोमीटर दूर तक के बच्चे कक्षा नौवीं और दसवीं में पढ़ते हैं। वर्तमान में शाला का परिसर एक ही है और स्कूल में करीब 350 बच्चे दर्ज हैं। कक्षा पहली से दसवीं तक दस कमरों की आवश्यकता है,  लेकिन यहां सिर्फ सात कमरे ही हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को टीनशेड या स्कूल मैदान में ही ब्लैक बोर्ड रखकर पढ़ाई के लिए शिक्षक मजबूर हैं। स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों की पढ़ाई के लिए नित-नए प्रयोग कर रहा है। इन प्रयोगों के लिए स्कूल में पर्याप्त जगह भी चाहिए होती है, लेकिन स्कूल में पर्याप्त जगह न होने से बच्चों को पढ़ाई में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। हाईस्कूल के बच्चों को प्रयोग करने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

जुगल किशोर पटेल ने दी थी जमीन
गांव में शासकीय जमीन नहीं होने पर गांव के ही एक किसान जुगल किशोर पटेल ने 0.06 हैक्टेयर जमीन स्कूल शिक्षा विभाग को वर्ष 2014 में दान दी थी। इसका नामांतरण भी हो चुका है। स्कूल भवन निर्माण नहीं होने से परेशान इनके भाई वर्तमान जनपद पंचायत सदस्य गंगाराम पटेल का कहना है कि यदि स्कूल शिक्षा विभाग को दान में दी गई जमीन कम पड़ रही हो तो हम अधिकतम एक एकड़ जमीन दान दे सकते हैं। वर्ष 2019 -20 में भवन निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। सिर्फ गड्ढे खोदने के बाद ठेकेदार ने कोई कार्य नहीं किया। तब से सभी लोग बिल्डिंग निर्माण की आस लगाए बैठे हैं। स्कूल प्राचार्य लक्ष्मीकांत डिमहा का कहना है कि स्कूल ने लगातार पत्र लिखे और बिल्डिंग की आवश्यकता बताई जा रहा है। बच्चों की दर्ज संख्या के हिसाब से जगह कम है। बच्चों को बिठाने के लिए अभी टीनशैड का उपयोग कर रहे हैं। 

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