फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शर्मनाक तस्वीर: बीमार बेटे के इलाज के लिए आई मां से लगवाया पोंछा, वीडियो वायरल होने पर हरकत में आया प्रशासन

Sun, 11 Oct 2026 11:10 PM IST
दमोह ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

दमोह जिला अस्पताल में बीमार बेटे का इलाज कराने पहुंची महिला के पुरुष वार्ड में पोछा लगाने का वीडियो वायरल हुआ है। महिला ने नर्सिंग स्टाफ पर सफाई कराने का आरोप लगाया। अस्पताल में 55 सफाईकर्मी तैनात हैं। प्रबंधन ने ड्यूटी नर्स, सफाई एजेंसी और सहायक अस्पताल प्रबंधक को नोटिस जारी किए हैं। 
विज्ञापन
दमोह जिला अस्पताल में पोंछा लगाती मजबूर मां - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जिला अस्पताल में अपने बीमार बेटे का इलाज कराने पहुंची एक महिला के पुरुष वार्ड में पोछा लगाने का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की सफाई व्यवस्था और मरीजों के परिजनों के साथ व्यवहार पर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला का आरोप है कि वार्ड में गंदगी फैलने के बाद ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने उसे फर्श साफ करने के लिए कहा था। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित कर्मचारियों और सफाई एजेंसी से जवाब मांगा है।

विज्ञापन


जानकारी के अनुसार, तेजगढ़ क्षेत्र के सिमरिया गांव की रहने वाली हल्की बहू अपने बीमार बेटे को लेकर जिला अस्पताल पहुंची थी। महिला ने बताया कि उसके बेटे को दस्त की शिकायत थी। उपचार के दौरान पुरुष वार्ड में फर्श पर गंदगी फैल गई। महिला का आरोप है कि उसे ही फर्श साफ करने के लिए कहा गया, जिसके बाद उसने पोछा लगाया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल की व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, महिला से किन परिस्थितियों में सफाई कराई गई और उसे ऐसा करने के लिए किसने कहा, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

ये भी पढ़ें- विवाद के दौरान सिर में पत्थर से हमला करने से हुई थी मौत, हाईकोर्ट ने दस साल की सजा काटने पर किया रिहा
विज्ञापन


55 सफाईकर्मियों की तैनाती, हर महीने लाखों खर्च
मामले में अस्पताल की सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से तीन सुपरवाइजर और 52 सफाईकर्मियों सहित कुल 55 कर्मचारी तैनात हैं। अस्पताल प्रबंधक डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह के मुताबिक, सफाई व्यवस्था पर हर महीने करीब आठ से नौ लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में सवाल है कि जब सफाई के लिए कर्मचारियों की तैनाती है और इस मद में हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो वार्ड में गंदगी साफ करने की जिम्मेदारी मरीज की मां पर क्यों आई? संबंधित समय पर सफाईकर्मियों की उपलब्धता और वार्ड की सफाई व्यवस्था की निगरानी भी जांच के दायरे में रहेगी।

वीडियो सामने आने पर प्रबंधन ने जारी किए नोटिस
वीडियो वायरल होने के बाद जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने बताया कि संबंधित ड्यूटी नर्सिंग ऑफिसर, सफाई एजेंसी और सहायक अस्पताल प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। सिविल सर्जन के मुताबिक, जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, संबंधित पक्षों के जवाब और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना के लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है।
विज्ञापन


जांच से तय होगी जिम्मेदारी
इस घटना ने अस्पताल में सफाईकर्मियों की ड्यूटी, वार्डों की निगरानी और मरीजों के परिजनों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि वार्ड में सफाईकर्मी उस समय मौजूद थे या नहीं और महिला को फर्श साफ करने के लिए किसने कहा था। सरकारी अस्पताल में मरीजों को उपचार के साथ स्वच्छ वातावरण और सम्मानजनक व्यवहार मिलना भी जरूरी है। अब अस्पताल प्रबंधन की जांच और प्रस्तावित कार्रवाई पर नजर रहेगी।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें