जंगली जानवरों को शिकारियों से बचाने और उनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग के सीसीएफ स्तर के अधिकारी भी अब जंगलों में गश्त करेंगे। प्रदेश स्तर पर दो महीने के लिए 1 दिसंबर से 'ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप' अभियान चलाया गया है। इसके तहत प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी मध्यप्रदेश भोपाल से एक पत्र जारी किया गया है, जिसे सभी अधिकारियों के पास भेजा गया है। इसके बाद मांसाहारी और शाकाहारी जानवरों की सुरक्षा के लिए अधिकारी भी जंगलों में उतरेंगे।
अब तक जंगली जानवरों की देखभाल और सुरक्षा का काम वीटगार्ड, डिप्टी रेंजर और रेंजर करते थे, लेकिन अब एसडीओ, डीएफओ और सीसीएफ स्तर के अधिकारी भी मैदान में उतरेंगे।
दमोह जिले में सामान्य वन और टाइगर रिजर्व दोनों ही क्षेत्र हैं, जहां बड़ी संख्या में मांसाहारी और शाकाहारी जानवर रहते हैं। खासकर नौरादेही अभ्यारण्य और तेंदूखेड़ा क्षेत्र में शिकारियों का खतरा अधिक है। यहां के जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए यह अभियान आवश्यक है।
अभियान से लाभ
'ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप' के चलते शिकारियों को रोकने में मदद मिलेगी। अब अधिकारी जंगलों का गश्त करेंगे, जिससे शिकारियों का हौसला कमजोर पड़ेगा। यह अभियान प्रदेश भर में चलाया जा रहा है, जिसमें निचले अमले को भी सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया गया है।
यह अभियान 1 दिसंबर से शुरू होकर 31 जनवरी तक चलेगा। गश्ती में सीसीएफ स्तर के अधिकारी भी शामिल होंगे और दिन-रात गश्त करेंगे। इसके अलावा, डॉग टीम की मदद से गश्ती की जाएगी, ताकि किसी भी शिकार की घटना का तुरंत पता चल सके।
निरंतर निगरानी
अभियान के तहत ऐसे स्थानों पर भी गश्त की जाएगी जहां राजस्व भूमि और वन भूमि मिलती है। जंगल के इलाकों में बिजली के तारों के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं को भी अधिकारियों द्वारा हल किया जाएगा। यदि यह अभियान सफल हुआ, तो जंगली जानवरों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।
वन विभाग के अधिकारियों का बयान
दमोह डीएफओ, ईश्वर जरांडे ने कहा कि वे खुद भी जंगलों में जाकर गश्त करेंगे। इस अभियान से वन्यजीवों की घटती जनसंख्या को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
जंगल में मौजूद वन्य प्राणी