दमोह में अंग्रेजों के जमाने में बनी जिला जेल 161 करोड़ रुपए में बिकने के बाद नई जेल का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया। जबकि नई जेल शहर से बाहर शिफ्ट होनी थी और इस प्रक्रिया के प्रारंभ होने से पहले ही वह रुक गई है। जिस एजेंसी ने शहर के बाहर बरपटी पहाड़ी पर जेल बनाने का टेंडर लिया था, वह अभी तक काम करने के लिए दमोह नहीं पहुंचीं है।
ऐसे में नई जेल बनाने का काम अधर में लटक गया है। जबकि हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने नई जेल बनाने के लिए जबलपुर बाईपास मार्ग पर बरपटी पहाड़ी पर मॉडल कॉलेज के सामने 25 एकड़ जमीन भी उपलब्ध करा दी थी, लेकिन इसके बाद एजेंसी नहीं आई तो प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
700 कैदी रखने की क्षमता
मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक जेल बनाने का टेंडर 82 करोड़ रुपए में हुआ था। इसके बदले में पुरानी जेल में रहने वाले 333 कैदी शिफ्ट करने के लिए नई जेल बनाई जानी थी, जिसमें एक साथ 700 कैदी रखने की क्षमता तय की गई थी। नई जेल बनाने के लिए हाउसिंग बोर्ड की ओर से टेंडर जारी किया गया था। पहले इसकी टेंडर प्रक्रिया रुक गई थी। बाद में टेंडर के लिए तीन फर्म सामने आईं थीं।
161 करोड़ रुपये में टेंडर लिया
उनमें एक योगेश एंड कंपनी भोपाल ने 161 करोड़ और जबलपुर की फर्म समदड़िया ने 151 करोड़ रुपए का टेंडर डाला था। इसके अलावा एक अन्य फर्म भी इसमें शामिल हुई थी। आठ जून को टेंडर खोले गए। जिसमें भोपाल की योगेश एंड कंपनी ने सबसे ज्यादा 161 करोड़ रुपये में टेंडर लिया था। एजेंसी को पहले बरपटी पर नई जेल बनानी थी, उसके बाद उसमें पुरानी जेल शिफ्ट करनी थी, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। क्योंकि एजेंसी काम करने के लिए दमोह पहुंची ही नहीं।
कोई पत्र व्यवहार नहीं हुआ
इस संबंध में हाउसिंग बोर्ड के जिला महाप्रबंधक रामकुमार बाथम का कहना है कि जिस एजेंसी ने टेंडर लिया है, वह काम करने के लिए दमोह नहीं आई है। आगे वह काम करेगी कि नहीं इसको लेकर भी कोई पत्र व्यवहार नहीं हुआ है।