गौरतलब है कि बुधवार को भोपाल के लालपरेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम को मुख्यमंत्री संबोधित कर रहे थे। फिर वहां पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया से नाराज लड़कियों ने पहुंचकर हंगामा किया और नारेबाजी शुरू कर दी।
लड़कियों ने कहा कि उन्होंने लिखित और शारिरिक परीक्षा पास कर ली लेकिन लंबाई कम होने के कारण उन्हें भर्ती से बाहर कर दिया गया। सीएम ने खुद कहा था कि महिलाओं को लंबाई में 3-4 सेंटीमीटर की छूट दी जाएगी। इसके बाद उन्होंने सीएम हाउस का घेराव भी किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद उनको सीएम के इस कार्यक्रम में आना पड़ा।
आंदोलनकारी लड़कियों में से एक ने कहा कि जेल में 9 लड़कियों का प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया गया। जो कि उनकी निजता का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि पुलिस कांसटेबल ने उनके चेंजिंग रूम में भी तांक- झांकी की।
वहीं लड़कियों के लगाए आरोपों पर केंद्रीय जेल भोपाल के अधीक्षक दिनेश नरगावे ने कहा कि जो भी महिला जेल में बंदी के रूप में आती है, उसका मेडिकल परीक्षण कराना सामान्य प्रक्रिया होती है। इसमें प्रेग्नेंसी टेस्ट भी शामिल है। उन्होंने कहा कि तांक-झांकी वाला मामला उनके संज्ञान में नहीं है।