यदि सबकुछ ठीकठाक रहा, तो मध्य प्रदेश इस वित्त वर्ष के अंत तक खुशी सूचकांक (हैप्पीनेस इंडेक्स) जारी करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। मध्य प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ हैप्पीनेस के सीईओ अखिलेश अर्गाल ने रविवार को बताया कि इसके लिए सरकार की तरफ से सर्वे कराकर डाटा एकत्र कराया जाएगा।
अखिलेश के मुताबिक, इस समय इस सर्वे में पूछे जाने वाले सवालों को खुशी सूचकांक (एचआई) के मानकों के हिसाब से निर्णायक रूप देने का काम चल रहा है। हमने चालू वित्त वर्ष के अंत तक सर्वे को पूरा कराकर पहला खुशी सूचकांक जारी कर देने का लक्ष्य बनाया है।
उन्होंने कहा, राज्य सरकार ने खड़गपुर के आईआईटी में रेखी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर द साइंस ऑफ हैप्पीनेस को अपने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में ‘नॉलेज पार्टनर’ के तौर पर जोड़ा है। इस सर्वे के दौरान मध्य प्रदेश के विभिन्न गांवों, कस्बों और शहरों के करीब 15 हजार लोगों से संपर्क साधकर जानकारी जुटाई जाएगी और इसके आधार पर ही सूचकांक तैयार किया जाएगा।
बता दें कि मध्य प्रदेश का अपना खुशी सूचकांक तैयार करने की योजना शिवराज चौहान के नेतृत्व वाली पिछली भाजपा सरकार ने बनाई थी। उस समय यह सूचकांक हालिया विधानसभा चुनावों से पहले ही जारी कर दिए जाने की योजना बनाई गई थी।
इन क्षेत्रों से जुड़े सवालों पर तय होगा सूचकांक
रहन-सहन, आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, उपलब्धियां, शौक, सकारात्मक व नकारात्मक अहसास, पारस्पकि संबंध, पर्यावरण से जुड़ाव आदि।
विश्व सूचकांक में भारत में घट रहीं खुशियां
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट के हिसाब से भारत में खुशियां लगातार घट रही हैं। 20 मार्च, 2019 को जारी इस रिपोर्ट में भारत विश्व खुशी सूचकांक में 2018 के 133वें स्थान से 7 स्थान नीचे उतरकर 2019 में 140वें स्थान पर पहुंच गया था।