घटना के दौरान मौजूद रही एक महिला डॉक्टर ने पहचान का खुलासा करने से इनकार करते हुए बताया था कि कोरोना के खिलाफ अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग का पांच सदस्यीय दल इलाके में गया था।
उन्होंने कहा कि मैं बहुत डरी हुई हूं। हम कोरोना वायरस संक्रमण के एक मरीज के संपर्क में आए लोगों को ढूंढ रहे थे। हमने जैसे ही इन लोगों से उनकी सेहत की स्थिति से जुड़े सवाल करने शुरू किए, तो उन्होंने इसका विरोध किया। तभी वहां कुछ और लोग आ धमके जिन्होंने हम पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए।
महिला डॉक्टर ने कहा कि वो तो शुक्र है कि कुछ पुलिस कर्मी पास ही थे, इसलिए हमारी जान बच गई। इस बीच, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण जड़िया ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि हमारा दल लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने के लिए काम कर रहा था।
लेकिन रहवासियों ने नासमझी में इस दल पर ही पथराव कर दिया। बहरहाल, यह शहर में कोई पहली घटना नहीं है जब कोरोना वायरस के खिलाफ अभियान चला रहे स्वास्थ्य कर्मियों को अप्रिय हालात का सामना करना पड़ा हो।