मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना वायरस से संक्रमित होने के अजीबो-गरीब मामलों का पता चला है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन की कोशिशों के बाद भी भोपाल में संक्रमण थम नहीं रहा है। यहां संक्रमण के ऐसे मामले दर्ज हो रहे हैं, जिन्हें जानकर आप चौंक जाएंगे। एक युवक ने अनजाने में एक संक्रमित व्यक्ति से नीम की पत्तियां लीं और कोरोना की चपेट में आ गया। वहीं सार्वजनिक नल से पानी भरने की वजह से एक अन्य परिवार कोविड19 वायरस से संक्रमित हो गया।
पूरा लॉकडाउन घर में गुजारा, फिर भी हुआ संक्रमित
कोरोना संक्रमण की कड़ी का पता लगाने के लिए जिला पुलिस ने उप पुलिस अधीक्षक अदिति भावसार के नेतृत्व में चार टीम बनाईं हैं। इस टीम ने नीम की टहनी लेने की वजह से संक्रमित हुए युवक से पूछताछ की, ताकि संक्रमण की वजह का पता चल सके। युवक ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वह किसी भी अन्य व्यक्ति के संपर्क में नहीं आया था। काफी देर बात करने पर युवक ने बताया कि उसने मकान की ऊपरी मंजिल पर रहने वाले एक युवक से नीम की पत्तियां मांगी थी। युवक ने पत्तियों को ऊपर से फेंका था, जिसे उसने उठाया था।
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भावसार ने बताया कि जिस युवक ने उसे नीम की पत्तियां दी थी, उसकी दो दिन बाद कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। तब जाकर पता चला की वह युवक आखिर कैसे संक्रमित हुआ था। उसने पत्तियां लेने के बाद इस बात का ख्याल ही नहीं किया कि देने वाला संक्रमित हो सकता है। जरा सी लापरवाही उस पर भारी पड़ गई।
सार्वजनिक नल से पानी भरने गए, संक्रमित होकर लौटे वापस
वहीं, दूसरी तरफ राजधानी के शाहजहांनाबाद क्षेत्र में सार्वजनिक नल से पानी भरना एक परिवार को भारी पड़ गया। परिवार के सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। एक सदस्य ने बताया कि जहां नल लगा हुआ है, वहां कई लोग संक्रमित पाए गए। हो सकता है इन्हीं से उन्हें संक्रमण हुआ है। एक सदस्य के संक्रमित होने के बाद पूरा परिवार संक्रमित हो गया। परिवार में नौ सदस्य है। सभी का कहना है कि वे सब्जी सहित अन्य सामग्री लेने बाहर नहीं गए।
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मरीज की रिपोर्ट दोबारा पॉजिटिव आने पर लैब पर उठे सवाल
वहीं, एक कोरोना पॉजिटिव मरीज ने स्वास्थ्य विभाग की कोरोना रिपोर्ट पर सवाल खड़ा किया है। दरअसल, बाणगंगा क्षेत्र में रहने वाले संक्रमित मरीज ने बताया कि वह 29 मई को संक्रमित पाया गया। उसके दूसरे दिन उसका नमूना लिया गया। जिसमें वह निगेटिव पाया गया। फिर उसे एहतियातन क्वारंटीन केंद्र भेज दिया गया।
जहां एक बार फिर चार जून को उसकी जांच की गई, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। लेकिन फिर 10 जून को लिए गए नमूने की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मरीज का कहना है कि यह कैसे संभव है, जबकि क्वारंटीन केंद्र में 10 दिन रखने का नियम है। ऐसे में तो कोरोना संक्रमण खत्म हो जाना चाहिए था।