मध्यप्रदेश के आगर-मालवा में कोरोना संक्रमण के इलाज से संबंधित अजीब मांग उठी है। दरअसल, कांग्रेस विधायक विपिन वानखेड़े ने मालवा के जिला अधिकारी को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टरों को इलाज करने से प्रतिबंधित नहीं किए जाने की मांग की है। पत्र के जरिये विधायक ने मांग की है कि झोलाछाप डॉक्टरों को कोरोना बीमारी का इलाज करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाए।
ग्रामीणों में कोरोना के इलाज को लेकर दहशत
जिला अधिकारी के नाम लिखे पत्र में वानखेड़े ने कहा, ‘आगर-मालवा में झोलाछाप डॉक्टरों को मरीजों का इलाज करने पर प्रतिबंधित किया गया है। मुझे जानकारी मिली है कि इस क्षेत्र के गांवों में कोरोना के इलाज को लेकर काफी दहशत है। डर के कारण ग्रामीण इलाज के लिए जिला अस्पताल नहीं जा रहे हैं। ऐसे में मेरा सुझाव है कि झोलाछाप डॉक्टरों को प्रतिबंधित करने की जगह उन्हें कोरोना संबंधित इलाज की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।’
दवाइयां भी उपलब्ध कराने की मांग
विधायक ने झोलाछाप डॉक्टरों को कोरोना के प्राथमिक उपचार के लिए दवाइयां भी उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने पत्र में लिखा, ‘झोलाछाप डॉक्टरों के साथ पटवारी, पंचायत सचिव या अन्य सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी चाहिए और उनके गांव में जाने की समय सीमा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।’
पत्र के जरिये किया अनुरोध
विपिन वानखेड़े ने अपने पत्र के जरिये जिला अधिकारी से निवेदन भी किया। उन्होंने लिखा, ‘झोलाछाप डॉक्टरों पर ग्रामीण जनता का काफी विश्वास है और आप भी जानते हैं कि कोरोना से लड़ने के लिए मरीज में आत्मविश्वास होना अति आवश्यक है इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि झोलाछाप डॉक्टरों को प्रतिबंधित करने की जगह दिशानिर्देश व ट्रेनिंग देकर उनका उपयोग स्वास्थ्य व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाए।’
दिशानिर्देशों को न मानने वाले झोलाछाप डॉक्टरों पर हो कार्रवाई
उन्होंने आगे लिखा कि ग्रामीण क्षेत्र जितना भय कोरोना से है, उससे ज्यादा भय जनता में झोलाछाप डॉक्टरों के प्रतिबंधित होने से बना हुआ है। लोग उपचार के लिए घुटन महसूस कर रहे हैं। इसके साथ ही विधायक ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई किए जाने की भी मांग की।