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जनआशीर्वाद रैली में भावुक हुए सीएम चौहान, कहा- मैं पिछड़ा हूं, इसलिए राजा-महाराजा परेशान कर रहे हैं

Fri, 27 Jul 2018 11:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना
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शिवराज सिंह चौहान - फोटो : ANI
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जन आशीर्वाद रैली में कल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भावुक हो गए और उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर जमकर निशाना साधा। एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे पिछड़ा वर्ग के सामान्य परिवार से आते हैं इसीलिए राजा-महाराजा उन्हें परेशान कर रहे हैं।
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चौहान कल पन्ना जिले में थे इसदौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर जमकर कटाक्ष करते हुए कहा कि ये लोग राजा-महाराजा हैं और वे स्वयं पिछड़ा वर्ग से आते हैं, इसलिए उन पर कांग्रेस नेता तरह तरह के आरोप लगाते रहते हैं। यही नहीं उन्होंने आगामी चुनाव के मद्दे नजर इस मौके को खूब भुनाने का प्रयास किया और कहा कि प्रदेश का मंत्री हो या फिर देश का प्रधानमंत्री उसे देश की जनता बनाती है और मैं यह कहना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री का अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं है।
 
दिग्विजय सिंह के बारे में चौहान ने कहा कि दिग्विजय अनाप-शनाप शब्द बना कर पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं। सिंह भगवा आतंकवाद, हिंदू आतंकवाद और फर्जी एनकाउंटर जैसी बातें करके पाकिस्तान को संदेश दे रहे हैं कि भारत में भी आतंकवाद है। उन्होंने कहा चूंकि मीडिया उनपर ध्यान नहीं देती इसलिए वह मीडिया में बने रहने के लिए वह ऐसे आरोप लगाते रहते हैं। 
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वहीं दूसरी तरफ उन्होंने सिंधिया का नाम लिए बिना कहा कि एक दूसरे नेता ग्वालियर से आते हैं, जिनका पत्थर में नाम नहीं होने के कारण उन्हें काफी बुरा लगा, जिला प्रशासन ने उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित किया था, पर उन्होंने मना कर दिया। 

15 वर्षों में अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ा प्रदेश 

पिछले दिनों गिना में आयोजित कार्यक्रम के बारे में बताते हुए चौहान ने कहा कि वहां कांग्रेस के विधायक जोर-जोर से बोल कर केंद्रीय मंत्री से बदसलूकी करने का प्रयास कर रहे थे, जिसका अधिकार उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में मप्र अंधेरे का प्रदेश था, कांग्रेस के मित्र इसका जवाब दें कि उन्होंने प्रदेश को बीमारू राज्य क्यों बना दिया। 
उन्होंने दिग्विजय सिंह के कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि प्रदेश की शिक्षा की बात करें या फिर बिजली की सबकुछ बीमारू था। शिक्षा व्यवस्था को बदहाल थी, गांव के स्कूल में पांच सौ रुपए तनख्वाह गुरुजी को दिया जाता था जो भावी पीढ़ी का भविष्य नहीं संवार सकता था।  
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