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'अब न्यायपालिका को 24 घंटे करना होगा काम': जबलपुर में बोले मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत, एआई पर भी दिया जोर

Sat, 16 May 2026 05:24 PM IST
Tarunendra Kumar Chaturvedi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जबलपुर में कहा कि न्यायपालिका को आम आदमी की पीड़ा और अपेक्षाओं को समझते हुए 24 घंटे अस्पतालों की तरह काम करना चाहिए। जानें  सीजेआई ने अपने संबोधन के दौरान और क्या-क्या कहा है?
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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जबलपुर में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा आयोजित “फ्रैगमेंटेशन टू फ्यूजन, एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन” कार्यक्रम को संबोधित किया है। शनिवार को अपने संबोधन के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने न्यायपालिका और आदमी को लेकर बड़ी बात कही है। 

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उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब न्यायपालिका को आम आदमी की पीड़ा, अपेक्षाओं और जरूरतों को तत्काल राहत देने वाली व्यवस्था के जरिए संबोधित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था को 24 घंटे काम करने वाले अस्पतालों की तरह कार्य करना चाहिए।

हाईकोर्ट के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का शुभारंभ हुआ
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका के समय की बर्बादी रोकने का सबसे प्रभावी समाधान तकनीक है। उन्होंने न्याय वितरण प्रणाली को तेज और प्रभावी बनाने के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित न्यायिक ढांचे को और मजबूत करने पर जोर दिया।इस दौरान उन्होंने हाईकोर्ट के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का शुभारंभ भी किया।

उन्होंने कहा, “भारतीय न्यायपालिका न केवल 1990 से न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा रही तकनीकी प्रगति का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि नवीनतम एआई तकनीकों का भी लाभ आम आदमी तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। ”सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “हमें तकनीक और एआई आधारित न्यायिक ढांचे को और गहरा करने की जरूरत है। न्यायिक समय की बर्बादी का एकमात्र प्रभावी समाधान तकनीक ही है।”

उन्होंने कहा कि अब वह समय आ गया है जब न्यायपालिका को आम आदमी की आकांक्षाओं, आवश्यकताओं, दर्द और पीड़ा को तत्काल राहत देने वाली व्यवस्था के माध्यम से संबोधित करना होगा। इसके लिए न्यायपालिका को अस्पतालों की तरह 24 घंटे और सातों दिन कार्य करना चाहिए।

 'महामारी के बीच न्यायपालिका ने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन किया'

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कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए सीजेआई ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय न्यायपालिका ने अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन किया और इसकी वैश्विक स्तर पर सराहना हुई। उन्होंने कहा, “हमने अपने न्यायालय बंद नहीं किए थे।” उन्होंने बताया कि महामारी के दौरान तकनीक की मदद से अदालतों में जरूरी मामलों की सुनवाई जारी रखी गई।

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मुख्य न्यायाधीश ने न्याय वितरण प्रणाली को तेज करने के लिए तकनीकी प्रगति के अधिकतम उपयोग पर बल दिया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अनुसार, इन तकनीकी व्यवस्थाओं को पूरे देश में लागू किए जाने की आवश्यकता है।

सीजेआई ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एआई के न्यायिक व्यवस्था में उपयोग को लेकर एक समिति भी गठित की है, जो विशेष रूप से मामलों के त्वरित निपटारे में एआई की भूमिका पर काम कर रही है। कार्यक्रम में केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने भी संबोधित किया।

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