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Chhindwara: आदिवासी महिला चौकीदार को दिल्ली परेड देखने का मिला आमंत्रण, कई बार हुआ खूंखार जानवरों से सामना

Sat, 25 Jan 2025 10:34 PM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा

सार

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गणतंत्र दिवस के समारोह में शामिल होने के लिए झुन्नी बाई वन विभाग के अधिकारियों के साथ दिल्ली के लिए ट्रेन से रवाना हो गई है।
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झुन्नी बाई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छिंदवाड़ा जिले में बिछुआ आदिवासी विकास खंड की ग्राम पंचायत पुलडोह के बैरियर पर कार्यरत एक ऐसी आदिवासी महिला जिसने कभी नई दिल्ली जाने का सपना भी नहीं देखा। लेकिन अब वह गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह की विशेष मेहमान बनकर पहुंच रही है। जानिए कौन है वह आदिवासी महिला और आखिर क्यों उसे दिल्ली से बुलावा आया है।

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वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गणतंत्र दिवस के समारोह में शामिल होने के लिए झुन्नी बाई वन विभाग के अधिकारियों के साथ दिल्ली के लिए ट्रेन से रवाना हो गई है। हालांकि, आदिवासी इलाके में रहने की वाली झुन्नी बाई अपने साथ न तो मोबाइल रखती है और न ही किसी तरह की डिजिटल उपकरणों का उपयोग करती है। सामान्य सा जीवन जीने वाली झुन्नी बाई के लिए गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में शामिल होना सपने से कम नहीं है।

पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि दिल्ली के कर्तव्यपथ में आयोजित होने जा रहे 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में केन्द्र सरकार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा विशेष अतिथि के तौर पर पेंच टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश से 48 साल की झुन्नी बाई उईके को विशेष अतिथि के तौर पर बुलावा आया है।
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झुन्नी बाई उईके पति स्वर्गीय मक्खन उईके करीब 20 सालों से पेंच टाइगर रिजर्व कोर एरिया में चौकीदारी का काम करती है। इस दौरान उनके कई बार जंगली जानवरों से सामना भी हुआ है। लेकिन कर्तव्य पथ से कभी पीछे नहीं हटी।

कोर एरिया में डटकर काम करने वाली एकमात्र महिला
पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि आदिवासी महिला झुन्नी बाई छिंदवाड़ा जिला के एक अत्यंत दूरस्थ ग्राम पुलडोह की निवासी है एवं आदिवासी गोंड समुदाय से आती है तथा विगत दो दशकों से भी अधिक समय से टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है। पेंच टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में इतनी लंबी अवधि से काम करने वाली यह एक मात्र महिला है एवं अपने पुरुष साथी वन कर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण में अत्यंत साहसिक ढंग से अपना योगदान दे रही हैं।

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