छिंदवाड़ा जिले के तामिया क्षेत्र के छातीआम गांव में बाघ की हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जिस खेत में बाघ को जहर देकर मारा गया, वहां अवैध रूप से अफीम की खेती भी की जा रही थी। वन विभाग की टीम को खेत में बड़ी संख्या में अफीम के पौधे मिले हैं। वन विभाग ने इस मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को दी, लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। इस देरी को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
डॉग स्क्वॉड से खुला पूरा मामला
वन विभाग की टीम 26 मार्च को बाघ की आखिरी लोकेशन के आधार पर छातीआम गांव पहुंची। यहां एक खेत में मृत बैल मिलने पर टीम को शक हुआ। इसके बाद डॉग स्क्वॉड को बुलाया गया।
डॉग स्क्वॉड की मदद से टीम आरोपी उदेसिंग के घर तक पहुंची। पूछताछ में आरोपी ने बाघ के शिकार की बात स्वीकार कर ली। आरोपी की निशानदेही पर टीम ने गांव से करीब 200 मीटर दूर जंगल में एक गड्ढे से बाघ का शव बरामद किया। बाघ को मारने के बाद उसे वहीं दफनाया गया था।
जहर देकर की गई हत्या
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि बाघ मवेशियों को नुकसान पहुंचा रहा था, इसलिए उसे यूरिया मिलाकर जहर दिया गया। हालांकि जांच में यह भी सामने आया है कि खेत में अवैध अफीम की खेती हो रही थी। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि बाघ की मौजूदगी से यह खेती प्रभावित हो रही थी। बाघ के रेडियो कॉलर से आखिरी लोकेशन 3 मार्च को मिली थी। इसके बाद कोई गतिविधि दर्ज नहीं हुई। इसके बावजूद वन विभाग की टीम करीब 23 दिन बाद मौके पर पहुंची। इस देरी को लेकर विभाग की निगरानी प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
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बांधवगढ़ से लाकर छोड़ा गया था बाघ
वन विभाग के अनुसार, मृत बाघ की उम्र करीब 4 साल थी। उसे डेढ़ साल पहले बांधवगढ़ से लाकर इस क्षेत्र में छोड़ा गया था। बाघ देनवा बफर और छिंदवाड़ा के वन क्षेत्र में लगातार घूम रहा था। पश्चिम वनमंडल के अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सभी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ की मौत जहर से होने की पुष्टि हुई है।