सरकार ने रसूखदारों पर सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं। बावजूद इसके ब्याज से पैसे देकर लोग अभी भी रसूखदारी से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला परासिया (छिंदवाड़ा) के चांदामेटा में सामने आया। जहां एक रसूखदार महिला का मकान गिरवी रखने के नाम पर हड़प लिया, जिससे परेशान महिला अब मकान वापस लेने के लिए दर-दर की ठोकर खा रही है।
दरअसल, यहां रहने वाली कनीज़ा आलम ने बताया कि वह अपने पति मोहम्मद इमरान आलम के साथ परासिया (छिंदवाड़ा) में रहती हैं। उनका मकान, जो उनकी सास स्वर्गीय अनीशा आलम के नाम पर है, नगर परिषद चांदामेटा में दर्ज है। सरकार द्वारा जारी पट्टा भी उनकी सास के नाम पर है। कनीज़ा आलम के गले में गठान होने पर डॉक्टर ने उन्हें तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी, जिसके लिए 70,000 से 80,000 रुपये खर्च आने का अनुमान था। उनके पास कुछ पैसे थे, लेकिन बाकी रकम के लिए उन्होंने विजय सोनी से 40,000 रुपये ब्याज पर लिए।
विजय सोनी ने गिरवी के नाम पर उनके मकान का मकाननामा अपने नाम करवा लिया और कहा कि जब रकम वापस हो जाएगी तो वह मकाननामा फाड़कर फेंक देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मकान का गिरवीनामा नहीं बनता। इसलिए उन्होंने मकान इकरारनामा बनवाया। इस स्थिति के अनुकूल होकर कनीज़ा आलम ने मकान गिरवी रखा और इस गिरवी नामा में उनके दो व्यक्ति गवाही में हैं। समय-समय पर उन्होंने विजय सोनी को 40,000 रुपये की रकम का ब्याज भी दिया।जब उनकी दैनिक स्थिति में सुधार हुआ और उन्होंने रकम जमाकर विजय सोनी के पास मकान वापस लेने के लिए गए, तो विजय सोनी ने कहा कि मकान वापस चाहिए तो उन्हें 3,00,000 रुपये और देने होंगे, नहीं तो वह मकान नहीं देंगे।
कनीज़ा आलम पिछले 10 से 15 साल से किराए के मकान में रह रही हैं और उनकी स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वह विजय सोनी को इतनी रकम दे पाएं। कुछ समय पहले पटवारी होने के कारण विजय सोनी ने उन्हें धमकाया भी और कहा कि 50,000 रुपये देकर मकान छोड़ दें। कनीजा आलम के छोटे-छोटे बच्चे हैं और वह बहुत परेशान हैं।