छिंदवाड़ा में 15 साल बाद लापता बेटी घर लौटी है।
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छिंदवाड़ा जिले के मानकादेही गांव से सामने आया मामला मानवता को झकझोर देने वाला है। ‘मुस्कान अभियान’ के तहत पुलिस ने वर्ष 2011 से लापता एक नाबालिग बालिका को खोज निकाला। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गांव की ही आशा कार्यकर्ता ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर किशोरी को दो लाख रुपये में बेच दिया था। 15 साल बाद बेटी के मिलने पर परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले।
नौकरी का झांसा, भोपाल से दतिया तक सौदा
सितंबर 2011 में मानकादेही निवासी महिला ने अपनी 15 वर्षीय बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में 2013 में अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज हुआ। पीड़िता ने बताया कि 10वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान गांव की आशा कार्यकर्ता रेखा मरकाम उसे नौकरी दिलाने के बहाने भोपाल ले गई और फिर दतिया जिले के बिंडवा बड़काछाई गांव में दो लाख रुपये में माताप्रसाद कुशवाह को बेच दिया।
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बंधक बनाकर रखा, अत्याचार सहती रही पीड़िता
आरोपी ने पीड़िता को बंधक बनाकर रखा और उसके साथ लगातार दुष्कर्म करता रहा। इस दौरान वह गर्भवती हुई और उसके दो बच्चे हुए। साल 2018 में आरोपी की मृत्यु के बाद पीड़िता अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए गुजरात चली गई, जहां मजदूरी कर जीवन यापन करती रही।
घर का रास्ता तलाशते लौटी, पुलिस ने संभाला
हाल ही में पीड़िता अपने गांव का पता पूछते हुए जुन्नारदेव पहुंची, जहां पुलिस ने उसे संरक्षण में लिया। पूछताछ में पूरी कहानी सामने आई। पुलिस ने मामले में धारा 370, 370(क)(ए), 376(2)(n) IPC और 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर मुख्य आरोपी रेखा मरकाम (48) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।