छिंदवाड़ा की अमरवाड़ा विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने प्रत्याशी तय कर दिया है। धीरनशा इनवाती को उम्मीदवार घोषित किया है। बता दें कि उनका मुकाबला कमलेश शाह से होगा। कमलेश भाजपा के प्रत्याशी हैं।
कल जीतू पटवारी भरवाएंगे नामांकन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी गुरुवार को दोपहर 12:00 बजे कांग्रेस प्रत्याशी धीरनशा इनवाती का नामांकन दाखिल करेंगे। उनके साथ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार भी मौजूद रहेंगे। आपको बता दें कि यह पहला मौका रहेगा, जब पूर्व सीएम कमलनाथ और नकुलनाथ नामांकन में मौजूद नहीं रहेंगे। धीरनशा इनवाती ने सेल्समैन पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है ऐसे में यहां असमंजस की स्थिति देखी जा रही है। बता दें कि दोपहर 12:00 बजे नामांकन दाखिल होगा। इसको लेकर कांग्रेस के द्वारा तैयारी की गई है।
शाह ने नामांकन दाखिल किया
इधर, अमरवाड़ा सीट से भाजपा प्रत्याशी कमलेश शाह ने आज मंगलवार को नामांकन कर दिया है। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा समेत अन्य नेता भी मौजूद रहे। भाजपा उम्मीदवार कमलेश शाह इस सीट से लगातार तीन बार विधायक बने हैं। लोकसभा चुनाव के बीच शाह के पार्टी में शामिल होने के समय भाजपा ने उन्हें उपचुनाव में उम्मीदवार बनाने का वादा किया था। पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया भी है। शाह का अमरवाड़ा सीट पर अच्छा प्रभाव है। वहीं, दूसरी तरह नकुलनाथ के छिंदवाड़ा से लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ता मायूस हैं, इसका फायदा भी पार्टी को मिल सकता है। भाजपा के कई नेता अमरवाड़ा जीतने की रणनीति बना रहे हैं। उसके तहत काम भी किया जा रहा है। ऐसे में पार्टी को उम्मीद है कि शाह चुनाव जीतकर इस सीट पर कमल खिलाएंगे।
नामांकन प्रक्रिया जारी, 10 जुलाई को होंगे चुनाव
उपचुनाव के लिए अब एक महीने का भी समय नहीं बचा है। अमरवाड़ा विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग ने चुनावी कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 21 जून को नामांकन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 24 जून को नामंकन पत्रों की समीक्षा होगी। इसके बाद 26 जून तक नाम वापस लिया जा सकता है। वहीं, मतदान 10 जुलाई को होगा और चुनाव के परिणाम 13 जून को आएंगे।
1951 से अब तक भाजपा सिर्फ दो बार चुनाव जीती
अमरवाड़ा सीट के इतिहास की बात करें तो 1951 से लेकर अब तक भाजपा यहां सिर्फ दो बार चुनाव जीती है। 1990 में भाजपा के मेहमान शाह उईके इस सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे, जबकि 2008 में प्रेम नारायण ठाकुर चुनाव जीते थे। इससे पहले एक बार 1967 में भारतीय जनसंघ के एसजे ठाकुर ने चुनाव जीता था। 1951 से 2023 तक यहा 14 बार चुनाव हो चुका है, जिसमें 11 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। इस लिहाज से देखा जाए तो कांग्रेस यहां मजबूत है, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 के बीच बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारियों, नेताओं और कार्यकर्ताओं के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी को यहां बड़ा झटका लगा है। इस सीट पर उपचुनाव भी इसलिए हो रहा है क्योंकि कांग्रेस से लगातार तीसरी बार विधायक बने कमलेश शाह इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। इस लिहजा से इस बार का चुनाव कांग्रेस के लिए आसान रहने वाला नहीं है। उसके सामने अपना किला बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है।