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Khajuraho Dance Festival: नृत्य की लय गतियों में खजुराहो में आनंद की अनुभूति, समारोह का पांचवा दिन

Fri, 24 Feb 2023 10:09 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

सार

खजुराहो नृत्य समारोह के पांचवां दिन की शुरुआत आकाश मलिक और रुद्र प्रसाद राय की कथकली तथा समकालीन नृत्य की युगल प्रस्तुति से हुई। आकाश और रुद्र की जोड़ी ने इस नृत्य में महाभारत से भीम और हनुमान के संवाद की लीला को पेश किया।
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मंच पर प्रस्तुति देते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छतरपुर जिले में शुक्रवार को खजुराहो नृत्य समारोह का पांचवां दिन रहा। खजुराहो के विस्तीर्ण मंच पर विभिन्न शैलियों के नृत्यों को अपनी देह में समाए नर्तक और नर्तकियों ने देह गतियों को प्रस्तुत किया। इस दौरान हर तरफ आनंद छा गया। शुक्रवार को कथकली, कथक और भरतनाट्यम के वैभव की चमक दमक में रसिक आनंदित होते रहे। समकालीन नृत्यभावों के जरिए सभी कलाकारों ने दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी।

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समारोह की शुरुआत आकाश मलिक और रुद्र प्रसाद राय की कथकली तथा समकालीन नृत्य की युगल प्रस्तुति से हुई। आकाश और रुद्र की जोड़ी ने इस नृत्य में महाभारत से भीम और हनुमान के संवाद की लीला को पेश किया। भीम को अपने बलशाली होने पर अभिमान होता है, जिसे बुजुर्ग हनुमान ध्वस्त करते हैं। महाभारत की यह कथा सभी ने सुनी और पढ़ी है। हनुमान जंगल में बैठे तपस्यारत हैं, भीम उनकी तपस्या को बाधित करते हैं। अपने को बलशाली होने का भीम को घमंड है, जिसे हनुमानजी तोड़ देते हैं। आकाश ने इस नृत्य संयोजन में हनुमान और रुद्र ने भीम की भूमिका में बढ़िया नृत्याभिनय किया है। कर्नाटकीय संस्कृत निष्ठ गीत संगीत से सजी इस प्रस्तुति में आकाश ने कथकली और रुद्र ने समकालीन नृत्यभावों के जरिए दर्शकों के दिल में जगह बनाई।

खजुराहो नृत्य समारोह - फोटो : अमर उजाला
शाम की दूसरी प्रस्तुति प्रख्यात ओडिसी नृत्यांगना शाश्वती गराई घोष के ओडिसी नृत्य की थी। खजुराहो के मंच पर उन्होंने "जय देवा हरे" नृत्य रचना से अपने नृत्य की शुरुआत की। कृष्ण कहें या भगवान विष्णु अथवा राम उन्हीं का महिमा गान इस प्रस्तुति की भावभूमि में था। वास्तव में यह एक शुभ नृत्य था जो हमारी चेतना के साथ प्रतिध्वनित होता है। नृत्य रचना खुद शाश्वती की गढ़ी हुई थी। संगीत निर्देशन सृजन चटर्जी का था। उनकी दूसरी नृत्य रचना माया मानव की थी।

विश्वनाथ खुंटीया द्वारा लिखित विचित्र रामायण से ली गई मृग मारीच या सुनहरे हिरण की कथा को शाश्वती ने ओडिसी के नृत्यभावों से बड़े ही सहज ढंग से पेश किया। इस प्रस्तुति के जरिए शाश्वती ने यह दिखाने की कोशिश की है कि माया इंसान को इस कदर जकड़ लेती है कि वह चाह कर भी नहीं छूट पाता। इस प्रस्तुति में नृत्य संयोजन शर्मिला विश्वास का था, जबकि संगीत रचना रमेशचंद्र दास और विजयकुमार बारिक की थी। नृत्य का समापन उन्होंने निर्वाण से किया। इस प्रस्तुति में पखावज पर विजयकुमार बारिक, गायन पर राजेश कुमार लेंका, वायलिन पर रमेश चंद दास एवं बांसुरी पर परसुरामदास ने साथ दिया।
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नृत्य देख कर मोहित हुए दर्शक - फोटो : अमर उजाला
नृत्य सभा का समापन बाला विश्वनाथ और प्रफुल्ल सिंह गेहलोत के भरतनाट्यम और कथक नृत्य की जुगलबंदी से हुआ। बाला भरतनाट्यम करती हैं और प्रफुल्ल कथक। इस प्रस्तुति में दोनों नृत्यानुशासनों के 16 कलाकारों ने भागीदारी की। समूह ने भगवान विष्णु के दशावतारों पर  अपनी नृत्य प्रस्तुति दी। कन्नड़ ओर संस्कृत की रचनाओं पर भरतनाट्यम औऱ कथक के विभिन्न नृत भावों और आंगिक अभिनयों से दोनों की विष्णु के अवतारों को साकार करने की कोशिश सफल हुई। इसमे जहां कथक के तोड़े टुकड़ों का इस्तेमाल किया गया तो वहीं भरतनाट्यम की पल्लवी का भी इस्तेमाल देखने को मिला। यह प्रस्तुति भी खूब सराही गई।
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