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छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: कुनाल ने मौत को दी मात, 115 दिन बाद इलाज के बाद घर वापसी, सूने आंगन में लौटी जिंदगी

Wed, 24 Dec 2025 11:08 AM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा

सार

छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड : जहरीले कफ सिरप कांड ने 27 मासूमों की जिंदगी को खत्म कर दिया था लेकिन इन्हीं में से जिंदा बचे तीन मासूमों में से एक कुनाल अब ठीक होकर घर लौट आया है। जाटाछापर गांव के पांच साल के इस मासूम की घर वापसी पर सूने पड़े घर में फिर खुशियां लौट आई हैं।
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115 दिन बाद घर लौटा कुनाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जब सांसें थमने की कगार पर हों और उम्मीद की लौ लगभग बुझ चुकी हो, तब चमत्कार सिर्फ दुआओं, डॉक्टरों की मेहनत और मरीज के जज्बे से ही होता है। जाटाछापर का पांच साल का मासूम कुनाल ऐसी ही एक जिंदा मिसाल बनकर सामने आया है। जहरीले कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ की चपेट में आकर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे कुनाल ने आखिरकार 115 दिन लंबी लड़ाई के बाद मौत को हरा दिया और अपने घर लौट आया। उसके लौटते ही वह घर, जो बीते तीन महीनों से वीरान था, फिर से खुशियों से भर उठा।

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27 मौतों के बीच जिंदा बची एक उम्मीद
कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। इस जहरीले सिरप ने 27 मासूम जिंदगियों को निगल लिया लेकिन उनमें से सिर्फ तीन बच्चे ही अस्पताल से जिंदा लौट सके। इन्हीं तीन में जाटाछापर का कुनाल भी शामिल है। यही वजह है कि कुनाल की घर वापसी को लोग किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे।

अगस्त में बिगड़ी थी तबीयत
24 अगस्त को अचानक कुनाल की तबीयत बिगड़ गई थी। शुरू में इसे मामूली बीमारी समझी गया, लेकिन जांच में सामने आया कि जहरीले कफ सिरप के कारण उसकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं। हालत बिगड़ने पर 31 अगस्त को पिता टिक्कू यदुवंशी उसे नागपुर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। इसके बाद एम्स नागपुर सहित अलग-अलग अस्पतालों में उसका इलाज चलता रहा।
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डायलिसिस और दवाइयों के सहारे बची जान
करीब चार महीने तक कुनाल अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ता रहा। इस दौरान उसे बार-बार डायलिसिस, महंगी दवाइयां और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। परिवार के लिए यह दौर बेहद पीड़ादायक रहा। हर दिन यही डर सताता रहा कि न जाने अगला दिन क्या लेकर आएगा लेकिन दुआओं, डॉक्टरों की मेहनत और कुनाल के जज्बे ने रंग दिखाया और सोमवार रात नागपुर के अस्पताल से कुनाल को छुट्टी मिल गई। 

मंगलवार सुबह जैसे ही उसके घर पहुंचने की खबर फैली, रिश्तेदारों, पड़ोसियों और शुभचिंतकों का तांता लग गया। लोग मासूम कुनाल को देखकर भावुक हो उठे। किसी की आंखों में खुशी के आंसू थे तो कोई उसे गोद में उठाकर दुलार कर रहा था।
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सूने घर में फिर लौटी खुशियां
तीन महीनों से जिस घर में सन्नाटा पसरा था, वहां अब फिर से रौनक लौट आई है। कुनाल के मां-बाप के लिए यह पल किसी त्योहार से कम नहीं था। हालांकि कुनाल खतरे से बाहर है, लेकिन उसकी राह अभी आसान नहीं है। पिता टिक्कू यदुवंशी के अनुसार डायलिसिस और लंबी दवाइयों के असर से कुनाल की आंखों की रोशनी और पैरों में कुछ समस्याएं हैं। डॉक्टरों ने भरोसा दिलाया है कि समय और नियमित इलाज से सुधार होगा। फिलहाल परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि उनका लाडला सुरक्षित घर लौट आया है।

गौरतलब है कि जहरीले सिरप कांड ने कई घरों के चिराग बुझा दिए थे लेकिन कुनाल की वापसी ने यह साबित कर दिया कि हर अंधेरे के बाद रोशनी जरूर होती है।

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