मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग में पदस्थ असिस्टेंट डायरेक्टर रामकुमार त्रिवेदी ने शुक्रवार सुबह अपने किराए के घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद मृतक की पत्नी मृदाक्षी त्रिवेदी ने बताया कि उनके पति को उनकी पढ़ाई और नौकरी की तैयारी से ऐतराज था।
मामले की जानकारी
रामकुमार त्रिवेदी (42), निवासी महू, छतरपुर के सटई रोड स्थित ग्रीन एवेन्यू कॉलोनी में पत्नी मृदाक्षी और डेढ़ वर्षीय पुत्री के साथ रहते थे। गुरुवार रात उन्होंने व्हाट्सएप स्टेटस पर लिखा, "जिंदगी में एक समय आता है, जब व्यक्ति को तय करना होता है कि अब उसे पन्ना पलटना है या किताब बंद करनी है।"
पत्नी के अनुसार, शुक्रवार सुबह रामकुमार ने कमरे में खुद को बंद कर फांसी लगा ली। जब उन्होंने दरवाजा तोड़कर पड़ोसियों और पुलिस को बुलाया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। शव को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद मौत की पुष्टि हुई।
पत्नी का बयान
मृदाक्षी ने कहा, "मेरी पढ़ाई को लेकर पति को हमेशा आपत्ति रहती थी। बीएड की परीक्षा के लिए जाने को लेकर हुई बहस के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। मैं पढ़ाई के साथ-साथ परिवार और बच्ची की पूरी जिम्मेदारी निभा रही थी। मुझे नहीं पता था कि वह इस हद तक परेशान थे।"
मृदाक्षी, जो इंदौर की मेडिकैप यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर चुकी हैं, बीएड की पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने कहा, "काश, वे मुझसे इस बारे में खुलकर बात करते; मैं पढ़ाई छोड़ देती। अब सबकुछ खत्म हो गया।"
मृतक की सास का दर्द
मृदाक्षी की मां रेखा तिवारी ने कहा, "हमने बेटी को बड़े नाजों से पाला और पढ़ाया। पढ़े-लिखे दामाद से शादी की, लेकिन हमें नहीं पता था कि यही पढ़ाई उसकी जिंदगी तबाह कर देगी। क्या आज के दौर में बेटी का पढ़ा-लिखा होना अभिशाप बन गया है?" पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आत्महत्या के कारणों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।