EOW Action ON CGPSC Scam: आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने पूर्व की कांग्रेस सरकार में चर्चित सीजीपीएससी घोटाले के पन्ने खोलने शुरू कर दिए हैं। ईओडब्ल्यू ने मामले में आरोपियों, पूर्व अधिकारियों एवं नेताओं पर एफआईआर दर्ज कर ली है। इस केस में सीजीपीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन सचिव और आईएएस जीवनकिशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक सहित अन्य ऑफिसर्स और कांग्रेस नेताओं पर ईओडब्ल्यू ने अपराध दर्ज किया है। इनके विरुद्ध धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। सीएम विष्णुदेव ने मामले में पूर्व की भूपेश सरकार पर निशाना साधा है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट कर लिखा कि 'विष्णु के सुशासन में भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कारवाई । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कोल परिवहन में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था एवं सुशासन को ध्यान में रखकर खनिज विभाग की ओर से 15 जुलाई 2020 को जारी परिपत्र एवं इसके अनुक्रम में जारी अन्य सभी अनुषंगी निर्देशों को निरस्त करने की घोषणा की।
सीएम ने दूसरे ट्वीट में लिखा कि 'CGPSC महाघोटाले के आरोपी पूर्व अधिकारियों एवं नेताओं पर EOW ने FIR दर्ज कर दी है। इस महाघोटाले में अपने भविष्य की बलि देने वाले मेरे सभी बच्चों को आश्वस्त करता हूं कि आपके साथ हुए अन्याय का हिसाब होगा। गुनहगार बचेंगे नहीं, हम आपकी प्रतिभा का सौदा करने वालों को उनके अंजाम तक पहुंचाकर रहेंगे।'
सीएम ने तीसरे ट्वीट में लिखा कि 'भ्रष्टाचार की जननी कांग्रेस पार्टी ने अपनी सरकार में जिला खनिज न्यास मद में पैसों के बंदरबांट के लिए एक नियम बनाया था, जिससे कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हुआ और पैसों की अफरातफरी। भ्रष्ट कांग्रेस सरकार में खनिज विभाग के संचालक द्वारा 15 जुलाई 2020 को आदेश जारी कर यह व्यवस्था दी गई थी कि जिले के खनिज अमले द्वारा ई-परमिट का भौतिक सत्यापन होने के बाद ही ई-ट्रांजिट पास जारी किया जा सकेगा। इस आदेश के माध्यम से इसके पहले जो ऑनलाईन प्रक्रिया थी उसको बंद करके ऑफलाइन किया गया था। जिससे प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप शुरू हुआ, भ्रष्टाचार के आक्षेप लगे और परिवहन में भी विलंब होता था। लेकिन आज छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक दिन है कि हमारी सरकार ने भ्रष्टाचारी दीमक रूपी इस नियम को ही खत्म कर दिया।
शीघ्र हो सकती है गिरफ्तारी
सूत्रों के मुताबिक, इस महाघोटाले में जिनके नाम सामने आए हैं, उन्हें नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद बयान दर्ज किया जाएगा। ईओडब्ल्यू जल्द ही इनकी गिरफ्तारी भी कर सकती है।
क्या है पूरा मामला
राज्य लोक सेवा आयोग ने सीजीपीएससी परीक्षा 2021 के तहत 12 विभागों के 170 पदों पर भर्ती के लिए 11 मई 2023 को चयन सूची जारी की थी। इसमें टॉप-15 नामों में भाई-भतीजावाद का आरोप लगा है। भाजपा प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन को ज्ञापन सौंपकर सीजीपीएससी मामले की जांच कराने की मांग की थी। विधानसभा चुनाव 2023 में भी यह मुद्दा सुर्खियों में रहा। चुनाव के दौरान बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को जमकर घेरा, जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए गए थे। भाजयुमो ने नवा रायपुर में पीएससी कार्यालय का घेराव कर करके इसकी जांच कराने की मांग की थी। चुनाव के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने पीएससी घोटाले की जांच कराने की घोषणा की थी। इसके बाद बीजेपी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य सेवा परीक्षा 2021 की गड़बड़ी की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने का आदेश दिया था।
पीएससी के खिलाफ 48 शिकायतें
भूपेश सरकार में सीजीपीएससी के खिलाफ लगभग दो वर्षों में 48 शिकायतें मिली थी। ये सभी शिकायतें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य गृहमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालयों में की गई है। कई शिकायतें राज्यपाल और मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से की गई है। इन शिकायतों में अधिकारियों और नेताओं के रिश्तेदारों को नौकरी देने से लेकर परीक्षा में अनियमितता और भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा, परिणाम में गड़बडी, पक्षपातपूर्ण कार्य के आरोप लगे हैं।