छतरपुर में 19 नवंबर की रात तकरीबन नौ बजे पुलिस को सूचना मिली कि ग्राम सौरा फोर लाइन पर निवास करने वाले परिवार गोपी राजपूत उर्फ संजू अपनी पत्नी और दो बच्चों आयुष राजपूत (10) और अरुण राजपूत (13) के साथ गाड़ियों के पंक्चर बनाकर परिवार का भरण पोषण करता है। किसी बात को लेकर उसके दोनों बच्चे घर से नाराज होकर बिना बताए चले गए।
थाने पर सूचना प्राप्त होते ही मामले की गंभीरता को समझते हुए थाना ओरछा रोड पुलिस तत्काल हरकत में आई और सभी संभावित स्थानों पर तलाश करना शुरू किया। जिले के समस्त थानों की टीम बच्चों की खोज में लग गई। इस दौरान पुलिस ने अलग-अलग टीमों को विभिन्न स्थानों पर बच्चों की तलाश के लिए भेजा। साथ ही शहर के विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी फुटेज, बस स्टैंड, महोबा फोर लाइन ब्रिज, हनुमान टोरिया और रेलवे स्टेशन आदि को चेक किया।
बागेश्वर धाम पर मिले बच्चे
इसी बीच पुलिस को जानकारी प्राप्त हुई कि शाम करीब 4:30 से पांच बजे के बीच दो नाबालिग बच्चे बताए हुए हुलिए से मिलते-जुलते फोर लाइन से खजुराहो की तरफ जाते हुए देखे गए थे। इस आधार पर रात तकरीबन दो बजे रेलवे स्टेशन होते हुए ग्राम गढ़ा बागेश्वर धाम में तलाश किया गया, जो राम दरबार पर सोते हुए पाए गए। जहां परिजनों की पहचान के बाद सुपुर्द किया गया। परिजनों ने भावुकता के साथ पुलिस विभाग का आभार व्यक्त किया।
इनकी रही मुख्य भूमिका
कार्रवाई में थाना प्रभारी ओरछा रोड उपमा सिंह, एसआई एचके द्विवेदी, प्रधान आरक्षक दाताराम पटेल, आरक्षक धर्मेंद्र, आरक्षक गुलाब खान, आरक्षक रज्जन लोधी और अन्य थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।