छतरपुर में राज्य आनंद विभाग के मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी, आशा असाटी, रामकृपाल यादव, शिवनारायण पटेल और नीलम पाण्डेय आदि ने अपने निजी अनुभवों को साझा कर हैप्पीनेस के टिप्स दिए। आनंदग्राम रामगढ़, रामपुर, बगौता और बनगांय के आनंदकों ने कार्यक्रम में शामिल होकर अपने अनुभव साझा किए।
लखनलाल असाटी ने अल्पविराम के बाद आनंद सभा के माध्यम से प्रतिभागियों को सेल्फ और बॉडी की विस्तार से जानकारी दी और बताया कि आंखों के माध्यम से शरीर मात्र 180 देख पाता हो, पर सेल्फ कल्पनाशीलता के माध्यम से 360 डिग्री देख लेता है। शरीर की आवश्यकताओं की सही समझ न होने से सारा समय सामान और सुविधाओं को जुटाने में लगा रहे हैं। परिवार में देखने जाएंगे तो दुख का कारण सुविधा के अभाव की जगह संबंध का निर्वाह न होने के कारण अधिक दिखाई देता है। परंतु प्रयास संबंध के निर्वाह में कम हो रहा है सुविधाओं के संग्रह में अधिक हो रहा है।
आवश्यकता का सही-सही निर्धारण हो जाने के बाद व्यक्ति बिना किसी का शोषण किए सुविधाएं जुटाने का कार्य करता है। भ्रष्ट आचरण का मूल आधार सामने वाले को संबंधी न मानना है। कल्पनाशीलता में चल रही इच्छा विचार आशा को सही-सही देख पाने तथा सहज स्वीकृति के आधार पर निर्णय लेने को महत्वपूर्ण बताया।
प्रतिभागियों में शैलेन्द्र अग्रवाल, गौरव अग्रवाल, डॉ. विवेक असाटी, राजीवरमन पटैरिया, कृष्णकुमार तिवारी, शरद कुमार नामदेव, विनोद कुशवाहा, दीक्षा यादव, मोहित तिवारी, ब्रजमोहन पटेल, महेन्द्र पटेल, अभिनय कुशवाहा, रजनीश सिंह चंदेल, उमेश रजक, संतोष अनुरागी, मिजाजीलाल कुशवाहा, अभिषेक कुशवाहा, विनोद अहिरवार, राघवेन्द्र पटेल, रोहिताश अहिरवार, मनोज कुमार साहू, रोहित रैकवार, ज्ञानचन्द्र अहिरवार, ऋतिक यादव और राजीव सिंह राय आदि शामिल रहे।