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MP: छतरपुर के शिव मंदिर में शिवलिंग से लिपटा दिखा नाग, दो घंटे तक बाहर से ही करते रहे श्रद्धालु दर्शन

Tue, 21 Jul 2026 09:36 PM IST
छतरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

सार

छतरपुर के गंगा सागर स्कूल के पास स्थित शिव मंदिर में मंगलवार को एक नाग करीब दो घंटे तक शिवलिंग से लिपटा रहा। श्रद्धालुओं ने सुरक्षा के चलते बाहर से ही दर्शन किए। नाग के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद नियमित पूजा-अर्चना शुरू हुई।

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शिवलिंग से लिपटा दिखाई दिया नाग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शहर के गंगा सागर स्कूल के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर में मंगलवार को उस समय श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल और आस्था का माहौल बन गया, जब एक नाग गर्भगृह में पहुंचकर शिवलिंग से लिपटा दिखाई दिया। करीब दो घंटे तक नाग शिवलिंग के पास रहा। इस दौरान दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने गर्भगृह में प्रवेश नहीं किया और बाहर से ही भगवान शिव के दर्शन करते रहे। नाग के सुरक्षित बाहर निकल जाने के बाद मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना शुरू हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह पूजा के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने देखा कि एक नाग शिवलिंग के चारों ओर लिपटा हुआ है। यह दृश्य देखते ही मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने अन्य श्रद्धालुओं को सतर्क किया और सुरक्षा की दृष्टि से किसी को भी गर्भगृह में प्रवेश नहीं करने दिया। सभी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की गई।

घटना की जानकारी मिलते ही मंदिर के बाहर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हो गए। कई लोगों ने इसे भगवान शिव और नागराज के दिव्य संबंध का प्रतीक मानते हुए आस्था का विषय बताया। श्रद्धालुओं का कहना था कि भगवान शिव को नागों का स्वामी माना जाता है और उनके गले में सदैव नाग विराजमान रहते हैं। ऐसे में शिवलिंग पर नाग का दिखाई देना उनके लिए एक दुर्लभ और अद्भुत दृश्य था।

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करीब दो घंटे तक नाग मंदिर परिसर में ही रहा। इस दौरान किसी ने उसे छेड़ने या हटाने का प्रयास नहीं किया। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने संयम बनाए रखा तथा सभी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। कई लोगों ने इस अनोखे दृश्य को अपने मोबाइल फोन में भी रिकॉर्ड किया।

कुछ देर बाद नाग अपने आप मंदिर से बाहर निकल गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान शिव का जलाभिषेक और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। घटना के दौरान किसी तरह की जनहानि या अप्रिय स्थिति नहीं हुई। लंबे समय तक मंदिर परिसर में इस घटना की चर्चा होती रही और श्रद्धालु इसे आस्था तथा प्रकृति के अद्भुत संयोग के रूप में देखते रहे।

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