ज्ञापन के माध्यम से किसानों का कहना था कि बिजावर तहसील सहित जिले में 7 जनवरी से लगातार 3 दिन तक बारिश के साथ ओलावृष्टि में अन्नदाता किसान भाइयों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। इसमें चना, मटर, राई की फसलों को तो काफी क्षति हुई थी। साथ ही टमाटर, मिर्च, बैगन आदि सब्जी और पान किसानों का बहुत नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि के समय तो नेताओं द्वारा घड़ियाली आंसू बहाए गए थे और शासन द्वारा आश्वासन दिया गया था कि सभी किसान भाइयों को उनकी क्षति का पूरा मुआवजा दिया जाएगा। किसानों का कहना था कि कोई भी पटवारी खेत तो क्या गांव में तक नहीं आए। पटवारियों द्वारा खेत-खेत जाकर डिटेल्ड सर्वे की बात गलत है व डिटेल सर्वे रिपोर्ट फर्जी है। रिपोर्ट पटवारियों द्वारा घर पर बैठकर मनगढ़ंत तरीके से तैयार की गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने जिले के विधायक सांसद व जनप्रतिनिधियों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि कि हमारे जनप्रतिनिधि महोदय जनता को झूठे आश्वासन तो देते हैं, पर किसी भी ठोस कार्रवाई से बचते हैं। जबरदस्त मनमानी व भ्रष्टाचार व्याप्त है, जिसका खामियाजा मजदूर किसान शहद गरीब जनता हर रोज भुगत रही है। गौरतलब है जिले में 7 जनवरी से लगातार 3 दिन तक बारिश के साथ ओलावृष्टि में अन्नदाता किसान भाइयों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा था, जिसमे बिजावर तहसील के 26 गांव के 2800 किसानों सहित जिले की 9 तहसीलों के 130 गांवों के 16518 किसानों की फसलों को नुकसान हुआ था, जिसमे कई किसानों की तो पूरे की पूरी फसल चौपट हुई थी, तो कई किसानों की 25 से लेकर 50 प्रतिशत तक फसल प्रभावित हुई है।
पटवारियों द्वारा डिटेल सर्वे रिपोर्ट में जिले के किसानों का नुकसान 10 से 20% ही दर्शाया गया है। आरबीसी 6 (4) के तहत फसल का नुकसान 24 परसेंट से अधिक होने पर ही किसानों को मुआवजा दिया जाता है, जिस कारण बड़ी संख्या में जिले के अन्नदाता किसाना मुआवजे से वंचित हो गए हैं। जन विकास संगठन ने महामहिम राज्यपाल के नाम के ज्ञापन में नाराजगी जाहिर करते हुए पटवारियों पर कार्रवाई की मांग की है व आंदोलन की चेतावनी दी है। ज्ञापन सौंपते समय शंकर लाल लोधी, रवि अहिरवार, उमासंकर चौरसिया, बहादुर आदिवासी, राहुल सिंह अहिरवार, बब्ली चौरसिया, मुलायम अहिरवार, सुरेश अहिरवार, हरिसंकर अहिरवार, प्रकाश अहिरवार, रामपाल शर्मा, नरेंद अहिरवार, लल्लू मिश्रा, मनोज अहिरवार,मिजाजी चौरसिया, जीतेन्द्र अहिरवार, रामलखन लखेरे, परशु अहिरवार, राकेश चौरसिया आदि किसान शामिल रहे।