फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केन-बेतवा आंदोलन: 16 दिन से नदी में जारी चिता आंदोलन पुलिस ने घेराबंदी कर कराया खत्म, संयोजक भटनागर हिरासत में

Sun, 19 Jul 2026 02:11 PM IST
छतरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

सार

केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में बराना नदी में 16 दिनों से चल रहे चिता आंदोलन को पुलिस-प्रशासन ने समाप्त करा दिया। आंदोलनकारी अमित भटनागर समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रशासन ने बढ़ते जलस्तर को कार्रवाई की वजह बताया, जबकि आंदोलनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग का आरोप लगाया।
विज्ञापन
केन-बेतवा आंदोलन में बड़ा मोड़, अमित भटनागर अस्पताल में भर्ती। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में बराना नदी के बीचों-बीच पिछले 16 दिनों से चल रहा सांकेतिक चिता आंदोलन रविवार तड़के पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई कर समाप्त करा दिया। दिन उगने के पहले ही भारी पुलिस बल ने नदी क्षेत्र की घेराबंदी कर आंदोलनकारियों को वहां से हटाया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर सहित कुछ प्रमुख साथियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया और हालात पर नजर रखी जा रही है। 

विज्ञापन




जानकारी के अनुसार, किशनगढ़ क्षेत्र की बराना नदी में आंदोलनकारी पिछले कई दिनों से सांकेतिक चिता बनाकर केन-बेतवा लिंक परियोजना में कथित अनियमितताओं और विस्थापन से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। रविवार तड़के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सुनियोजित रणनीति के तहत नदी के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाया और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस के पहुंचते ही मौके पर कुछ देर विरोध हुआ, लेकिन भारी पुलिस बल के बीच सभी आंदोलनकारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। 
विज्ञापन


भटनागर कई मामलों में फरार थे : पुलिस
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अमित भटनागर को भी हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि उनके खिलाफ पहले से हत्या के प्रयास, शासकीय कार्य में बाधा सहित विभिन्न मामलों में प्रकरण दर्ज हैं और वे लंबे समय से फरार चल रहे थे। हिरासत में लेने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराकर उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया तथा आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई। 

ये भी पढ़ें- मोहन कैबिनेट ने यूसीसी मसौदे को दी मंजूरी, निकाह हलाला होगा दंडनीय अपराध; लिन-इन के लिए सख्त नियम

सुरक्षा के लिए जरूरी थी कार्रवाई : कलेक्टर
छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने पूरे मामले में प्रशासन का पक्ष रखते हुए कहा कि हाल के दिनों में हुई बारिश के कारण बराना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। ऐसे में नदी के बीच बैठे प्रदर्शनकारियों की जान को खतरा हो सकता था। इसी को देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें वहां से हटाया गया। परियोजना प्रभावित ग्रामीणों की प्रमुख मांग विस्थापन पैकेज को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये किए जाने की थी, जिसे राज्य सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसकी जानकारी आंदोलनकारियों को कई बार दी गई थी। आंदोलन के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। वहां मौजूद पन्ना जिले के लोगों को सुरक्षित बसों के जरिए उनके गांव भेज दिया गया। 400 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आंदोलनकारियों के आरोपों पर कलेक्टर ने कहा कि जिला प्रशासन को अब तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत या साक्ष्य प्राप्त नहीं हुए हैं। शिकायत और प्रमाण प्रस्तुत किए जाते हैं तो नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
विज्ञापन


पुलिस ने लाठी चलाई, महिलाओं को जबरन उठाया : भटनागर
उधर, आंदोलन स्थल से हिरासत में लिए गए चिता आंदोलन के संयोजक अमित भटनागर ने अस्पताल में भी अनशन जारी रखा। उनका कहना है कि मैं न ही ड्रिप लगवाऊंगा न ही कुछ खाऊंगा। मेरा आमरण अनशन जारी रहेगा। अगर मुझे खिलाने की जबरन कोशिश की या बोतल लगाई तो मैं पानी पीना और सांस लेना छोड़ दूंगा। महिलाओं ने बच्चों को लेकर नदी पार की इसके बावजूद भी पुलिस ने लाठी चलाई। विस्थापितों की जान की परवाह किए बिना प्रशासन ने बर्बरतापूर्वक आंदोलनकारियों को उठाया। आदिवासी महिलाएं नदी पार कर रही थीं। उसी बीच अपना प्रदर्शन भी कर रही थीं। पुलिस प्रशासन ने जबरन उनको उठाया। वहीं, एडीएम विनय द्विवेदी और एएसपी आदित्य पाटले ने बताया कि अमित भटनागर पिछले 11 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है और इसके लिए उनकी सहमति भी ली गई।

पहले वांगचुक को हटाया और अब अमित भटनागर को : सिंघार
उधर, मध्य प्रदेश विस में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार ने असहमति की हर आवाज को कुचलना अपना शासन मॉडल बना लिया है। सरकार उन प्रदर्शनकारियों से डरती है, जो सरकार से नहीं डरते। कल जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक और उनके साथियों को जबरन हटाया गया और आज केन-बेतवा लिंक परियोजना में भ्रष्टाचार, कानून के उल्लंघन और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे अमित भटनागर सहित सभी आंदोलनकारियों को पुलिस बलपूर्वक हटा दिया। सरकार ने संवाद का रास्ता चुनने के बजाय दमन का रास्ता चुना।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें