सीबीआई ने व्यापम घोटाला मामले में पहली कार्रवाई करते हुए पांच एफआईआर दर्ज की है। बुधवार को दर्ज की गई ये एफआईआर मध्यप्रदेश सरकार की एसटीएफ की अब तक की जांच के आधार पर की गई है।
सीबीआई के मुताबिक पहली एफआईआर 2010 के प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) से संबंधित है, जिसमें 21 परीक्षार्थियों को आरोपी बनाया गया है। इनपर आईपीसी के विभिन्न धाराओं के तहत जालसाजी, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल और आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाया गया है।
दूसरा मामला 2011 के प्री पीजी परीक्षा का है जिसमें आठ लोग आरोपी हैं। इनपर एमपी रिकॉग्नाइज एक्जामिनेशन एक्ट के तहत जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र संबंधी धाराएं लगाई गई हैं। जबकि तीसरी एफआईआर में 2009 और 2010 के पीएमटी में हुई धांधली के मामले में 28 लोग आरोपी हैं।
चौथी एफआईआर मध्यप्रदेश में 2013 के दौरान 100 फॉरेस्ट गार्ड की बहाली में हुए घपले के खिलाफ है। इस मामले में इन सभी गार्डों को नामजद किया गया है। यह वही मामला है, जिसमें राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था लेकिन संविधान की ओर से प्रदत्त राज्यपालों को अदालती कार्रवाई से छूट के विशेषाधिकार की वजह से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था।
पांचवीं एफआईआर कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों में पीएमटी के जरिये फर्जी ढंग से एडमिशन के खिलाफ दर्ज कराई गई है। इसमें तीन लोगों को नामजद किया गया है।
जल्द होगी बड़ी कार्रवाई
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई की उम्मीद है। गौरतलब है कि एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसी सोमवार को इस मामले की तहकीकात अपने हाथों में ली थी।
इस सिलसिले में एजेंसी के संयुक्त सचिव आरपी अग्रवाल और डीआईजी अश्वनी चांद अपनी टीम के साथ भोपाल में हैं। सीबीआई एसटीएफ प्रमुख सुधीर साही के साथ बैठक कर पूरी फाइलों और केसों को समझ रही है।
सीबीआई को यह फैसला करना है कि एसटीएफ के सभी 55 मामलों को अपने एफआईआर में बदलेगी या कुछ मामलों को एक साथ मिलाकर एफआईआर की संख्या कम करेगी। इसके साथ ही सीबीआई को व्यापम से जुड़ी मौतों की भी तहकीकात करनी है। एजेंसी ने इस जांच के लिए फिलहाल 40 लोगों की टीम बनाई है।
शिवराज के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस का एमपी बंद
व्यापम मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को प्रदेश बंद का आह्वान किया है। हालांकि बंद के खिलाफ एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट जबलपुर ने राज्य सरकार एवं कांग्रेस को नोटिस जारी किया है। इस पर कांग्रेस ने कहा कि उसे अखबारों के जरिए नोटिस जारी होने की जानकारी मिली है।
नोटिस मिलने के बाद उसका जवाब दिया जाएगा। प्रदेश प्रभारी एवं महासचिव मोहन प्रकाश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में व्यापम की जांच भी कांग्रेस की मांगों में शामिल है। उन्होंने आशंका जताई कि कांग्रेस को बदनाम करने के लिए भाजपा प्रदेश बंद के दौरान हिंसा फैला सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा को इतने व्यापक घोटाले और इसमें हुईं तमाम मौतों का तनिक भी अफसोस है। इतना ही नहीं भाजपा मामले में उल्टा अपने मुख्यमंत्री पर गर्व कर रही है।
इस बीच प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अरुण यादव, नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे और उपाध्यक्ष माणक अग्रवाल समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने भोपाल की सेंट्रल जेल में दो दिनों से बंद कांग्रेसियों से मुलाकात करने गए, तो वहां उनकी व्यापम घोटाले के आरोपी पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से भी बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि उन्होंने मामले में शर्मा से सच बताने का आग्रह किया है।