मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार को कहा कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रगान का अपमान कर देश और रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘ममता दीदी सिद्धि विनायक जा रही हैं, कमलनाथ जी हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं, केजरीवाल जी तीर्थ यात्रा करवा रहे हैं, राहुल जी कश्मीरी पंडित बन रहे हैं, देश को और कितने अच्छे दिन चाहिए?
मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo पर वीडियो शेयर किया है। इसमें वे मीडिया से बातचीत करते हुए ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाते सुने जा सकते हैं।
ममता दीदी सिद्धि विनायक जा रही हैं, कमलनाथ जी हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं, केजरीवाल जी तीर्थ यात्रा करवा रहे हैं, राहुल जी कश्मीरी पंडित बन रहे हैं। देश को और कितने अच्छे दिन चाहिए?
View attached media content
- Dr.Narottam Mishra (@drnarottammisra) 2 Dec 2021
बिना शरीर के प्रेतात्मा बनकर घूमेगी कांग्रेस
डॉ. मिश्रा ने कपिल सिब्बल के उस नारे को भी आड़े हाथ लिया, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस को यूपीए की आत्मा बताया था। मिश्रा ने कहा- यूपीए में कई ऐसे लोग है जो भारत बदनाम, सेना बदनाम, वैक्सीन बदनाम के नारे लगाते घूमते हैं। हमेशा टुकड़े-टुकड़े गैंग का समर्थन करते हैं। न बुआ साथ, न बबुआ साथ, न ममता दीदी साथ, न शरद पवार साथ। फिर भी कपिल सिब्बल कांग्रेस को यूपीए की आत्मा बता रहे हैं। जब सारे दल साथ छोड़ रहे हैं, तो बिना शरीर के ये ‘आत्मा’ अब ’प्रेतात्मा’ बनकर ही घूमेगी।
न बुआ साथ, न बबुआ साथ, न ममता दीदी साथ, न शरद पवार साथ। फिर भी कपिल सिब्बल कांग्रेस को UPA की आत्मा बता रहे हैं। जब सारे दल साथ छोड़ रहे हैं, तो बिना शरीर के ये ‘आत्मा’ अब ’प्रेतात्मा’ बन कर ही घूमेगी।
View attached media content
- Dr.Narottam Mishra (@drnarottammisra) 2 Dec 2021
#MamataBanerjee ने राष्ट्रगान का अपमान कर देश और रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान किया है। UPA में कई ऐसे लोग है जो भारत बदनाम, सेना बदनाम, वैक्सीन बदनाम के नारे लगाते घूमते हैं और हमेशा टुकड़े-टुकड़े गैंग का समर्थन करते हैं।
View attached media content
- Dr.Narottam Mishra (@drnarottammisra) 2 Dec 2021
मुंबई में राष्ट्रगान की 4 लाइनें पढ़ी थी ममता ने
मुंबई एक कार्यक्रम के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठे-बैठे राष्ट्रगान की चार लाइनें पढ़ी। फिर जय हिंद कर दिया था। इस पर विवाद हो गया है। इसे राष्ट्रगान का अपमान कहा जा रहा है। वैसे, राष्ट्रगान पढ़ने का नियम है। सार्वजनिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान को बैठकर गाना उसका अपमान माना जाता है।
क्या है राष्ट्रगान
हमारा राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ है। इसे रविंद्रनाथ टैगोर ने मूल तौर पर बांग्ला में लिखा था। ‘जन गण मन’ में पांच छंद हैं। 28 फरवरी, 1919 को टैगोर ने राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का अंग्रेजी में अनुवाद किया। शीर्षक था- मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया। इसका हिंदी-उर्दू रूपांतरण इंडियन नेशनल आर्मी के कैप्टन आबिद अली ने किया था। पहली बार राष्ट्रगान को 27 दिसंबर, 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन के दूसरे दिन गाया गया था। राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के पहले छंद को संविधान सभा ने आधिकारिक रूप से 24 जनवरी, 1950 को मान्यता दी थी।
क्या हैं राष्ट्रगान के नियम
जब राष्ट्रगान गाया या बजाया जाता है तो गाने और सुनने वालों को खड़ा रहना चाहिए. श्रोताओं को उस समय सावधान की मुद्रा में रहना चाहिए। राष्ट्रगान को महज 52 सेकंड में गाना है। संक्षिप्त संस्करण को 20 सेकंड के भीतर गाना है। संक्षिप्त संस्करण में राष्ट्रगान के पहली और अंतिम पंक्ति को गाया जाता है।