'जहां चाह वहां राह', 'जीवन में बाधाओं के बावजूद कड़ी मेहनत का फल हमेशा मिलता है' जैसे दमोह की रहने वाली सृष्टि तिवारी ने असल जिंदगी में भी कर दिखाया है।
दृष्टिबाधित सृष्टि तिवारी ने 12वीं कक्षा में कला समूह में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मैरिट में पहला स्थान हासिल किया है। है।
दृष्टिबाधित होने के कारण सृष्टि खुद पढ़ नहीं सकतीं। ऐसे में उनके नाना-नानी ही उन्हें किताबें पढ़कर सुनाते और याद कराते थे। उन्हें परीक्षा देने के लिए एक राइटर मिला हुआ था।
इन मुश्किल हालात के बावजूद भी सृष्टि ने 500 में 481 अंक हासिल किए। इससे पहले भी वह हाईस्कूल में डिसएबल्ड केटेगरी में पहल स्थान प्राप्त कर चुकी हैं।
अमर उजाला से बातचीत में सृष्टि कहती हैं 'परिवार, टीचर्स और दोस्तों के सहयोग के बिना यह सफलता नामुमकिन थी।'
सृष्टि शहर के जेपीबी गर्ल्स स्कूल में पढ़ती हैं और उनके पिता उद्योग विभाग में काम करते हैं। सृष्टि यहां अपने नाना नानी और मामा के साथ रहती हैं। उनके माता-पिता सुनीता व सुनील तिवारी भोपाल में रहते हैं।
पूरे परिवार ने की पढ़ाई
ऐसे हालात में आमतौर पर लोग बच्चे की पढ़ाई छुड़वा देते हैं लेकिन सृष्टि की पढ़ने की चाहत देखते हुए उनके माता पिता और नाना नानी ने उनकी पढ़ने की चाह पूरी करने की ठानी।
नाना नानी ने बताया की सृष्टि को पढ़ने का बहुत शौक था इसी के चलते हमने भी उसके साथ मेहनत करने का निश्चय किया।
कैसे करती थीं तैयारी
सृष्टि तिवारी ने अमर उजाला को बताया की दृष्टिबाधित होने कारण उन्हें खुद से पढ़ने में दिक्कत आती थी। ऐसे में उनके नाना-नानी पढ़कर उन्हें याद कराते थे। मामा उनके लिए नोट्स बनाते थे।
सृष्टि ने इसी तरह अलग-अलग किताबों की सहायता ली, अपना स्लेबस समझा और तैयारी की। वह छोटी क्लास से ही ऐसी ही पढ़ती आई हैं।
बनना चाहती हैं आईएएस
सृष्टि का कहना है कि वह यूपीपीएसी टॉप करके आईएएस बनाना चाहती हैं और अपने जैसे लोगों की मदद करना चाहती हैं।
म्यूजिक का भी शौक
सृष्टि म्यूजिक सुनाना बहुत पसंद करती हैं। साथ ही उन्हें अलग-अलग तरह की किताबें पढ़ने का भी बहुत शौक है। भूगोल, राजनीति विज्ञान और इतिहास जैसे विषयों में सृष्टि को खास रूचि है।
सोशल नेटवर्किंग से रहीं दूर
सृष्टि ने बताया कि पढ़ाई पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट से दूरी बनाने का निश्चय किया था। इसके लिए उन्होंने अपनी ईमेल आईडी भी नहीं बनाई। सृष्टि किसी भी गैरजरूरी चीज में अपना समय नष्ट करने से बचना चाहती थीं।