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विश्व आदिवासी दिवस: छुट्टी की मांग को लेकर कांग्रेस का मप्र विस से वॉकआउट, शिवराज बोले- घड़ियाली आंसू बहा रही पार्टी

Mon, 09 Aug 2021 06:13 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

नौ अगस्त को मनाए जा रहे विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर मप्र में सियासत गर्मा गई। राज्य विधानसभा में कांग्रेस ने बहिष्कार किया। वहीं सीएम शिवराज ने कहा कि आदिवासियों के उत्थान के मामले में भाजपा से बेहतर कोई दल नहीं है। 
 
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सीएम शिवराज और पूर्व सीएम कमलनाथ
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विस्तार
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सोमवार को मनाए जा रहे विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर मध्यप्रदेश में सियासत गर्मा गई। पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा कि हमने सरकारी छुट्टी दी थी, जिसे मौजूदा भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। वहीं, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकारी छुट्टी है। कांग्रेस घड़ियाली आंसू बहा रही है। 

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में कांग्रेस व भाजपा के बीच तकरार के बीच कहा कि कांग्रेस ने आज सदन का प्रोटोकॉल तोड़ दिया। आदिवासियों के प्रति सम्मान प्रकट करने के हमारे प्रयासों में बाधा डाली। वह सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाना चाहती है। नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर घोषित अवकाश है। 
 
दूसरी ओर कांग्रेस विधायक ने सरकारी छुट्टी की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। इससे पहले उन्होंने सोमवार को सरकारी अवकाश घोषित करने की मांग की स्पीकर ने उनकी मांग मंजूर नहीं की और कहा कि मामले पर बाद में चर्चा की जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ झूठ व लोगों में भ्रम फैला रही है। कांग्रेस ने केंद्र में वर्षों तक राज किया, लेकिन आदिवासी विभाग का गठन पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान किया गया था। 
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कमलनाथ ने लगाया आदिवासियों के अपमान का आरोप
उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा कि आज विश्व आदिवासी दिवस पर राज्य सरकार ने आदिवासियों का अपमान किया। हमने विश्व आदिवासी दिवस पर अवकाश दिया था ,शिवराज सरकार ने उस अवकाश पर रोक लगाई। आदिवासी विरोधी है बीजेपी सरकार। आदिवासी तो सिर्फ़ सम्मान के लिए भूखा है। आदिवासी दिवस पर हमारी सरकार ने छुट्टी घोषित की थी और हर ब्लॉक में इस दिवस को मनाने के लिये पैसा भी भेजा था ताकि आदिवासी वर्ग अपना त्यौहार धूमधाम से मना सकें। यह विश्व आदिवासी दिवस है। भाजपा सरकार ने तो इसे अब आदिवासी अपमान दिवस बना दिया है। हमें इस बात का बड़ा दुख है।

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