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Women’s Day 2024: महिला दिवस का अनूठा कार्यक्रम, न अतिथि-न वक्ता, हर महिला ने सुनाई अपनी कहानी

Fri, 08 Mar 2024 04:29 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भोपाल

सार

आयोजन में कोई औपचारिकता नहीं थी। यहां कोई अतिथि नहीं और कोई वक्ता नहीं था। बस समाज के अलग-अलग वर्ग से वे महिलाएं शामिल हुईं। जिन्होंने अपने-अपने दौर में अपने-अपने स्तर पर कहीं न कहीं अपने को एक खास मुकाम पर लाने के लिए उस दौर से गुजरने का कार्य किया। 
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महिला दिवस को समर्पित रंगोली - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हर जिंदगी की एक कहानी होती है और उस कहानी से कई लोगों को प्रेरणा मिल सकती है। सबसे अहम बात यह है कि ये कहानी दबी रह जाती है। ऐसी कहानी जो प्रेरणा से अपनी सफल जिंदगी बन सकती है, वह भी दबी रह जाती हैं। इसलिए एक अभिव्यक्ति और उस अभिव्यक्ति में अपनी-अपनी कहानी को व्यक्त करने की भी जरूरत होती है। ऐसे ही कहानी का मंच भोपाल में आवाजों की कहानी शी द वॉइस स्टार के तहत कई महिलाओं व युवाओं ने अपनी जिंदगी की संघर्ष की कहानियों को अभिव्यक्त किया। 
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भोपाल में महिला दिवस के आयोजन में अपनी बात कहानी के रूप में रखतीं वक्ता - फोटो : सोशल मीडिया
आयोजन में कोई औपचारिकता नहीं थी। यहां कोई अतिथि नहीं और कोई वक्ता नहीं था। बस समाज के अलग-अलग वर्ग से वे महिलाएं शामिल हुईं। जिन्होंने अपने-अपने दौर में अपने-अपने स्तर पर कहीं न कहीं अपने को एक खास मुकाम पर लाने के लिए उस दौर से गुजरने का कार्य किया। जो कि हर किसी के लिए आसान नहीं होता है। इस आयोजन में मधु चौधरी, अनामिका चक्रवर्ती, पिंकी तिवारी, पुष्पा अवस्थी, नूपुर शर्मा, दिव्या पंवार, शेफाली पांडे, गायत्री परिहार सहित अन्य कई महिलाओं ने सहज तरीके से अपनी जीवन की प्रेरणादायी कहानी सुनाई। दरअसल यह अपनी खुद की कहानी और अपनी सफलता की मंजिल को सुनाने का मंच नहीं था, बल्कि इन सभी सम्मानीय महिलाओं ने स्टोरी टेलिंग यानी किस्सा गोई के रूप में प्रस्तुत किया। सुनने वाले भी रोमांचित होते और सुनने वाले भी भावुक हो गए। 

 

भोपाल में महिला दिवस के आयोजन में अपनी बात कहानी के रूप में रखतीं वक्ता - फोटो : सोशल मीडिया
इसमें जहां महिलाएं शामिल हुई तो वहीं आदिवासी अंचल की बालिकाओं की भी अपनी आवाज को बुलंद करने की कोशिश थी। इसमें धार-झाबुआ-हरदा जिले की वे यूवा और बालिकाएं शामिल हुईं। जिन्होंने कम उम्र में अपने आपको उस मुकाम पर पहुंचने के प्रयास किए हैं, जिससे वे उत्साहित हैं, उमंग से भरी हुई है। इन बच्चियों ने अपने हाथ में माइक थामा और अपनी कहानी सुनना शुरू की। संचालन शेफाली चतुर्वेदी ने किया। इस मौके पर यूनिसेफ के कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट अनिल गुलाटी ने कहा कि यह एक ऐसा मंच था। जहां स्टोरी टेलर होने अपने जीवन के अनुभव साझा किए हैं। इस तरह से किस्सा कोई की जो एक परंपरा रही थी। उसे परंपरा एक बेहतर मंच था। जहां पर महिलाओं और बालिकाओं ने अपने आप को अभिव्यक्त किया।

 
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भोपाल में महिला दिवस का एक अलग कार्यक्रम हुआ - फोटो : सोशल मीडिया
ये आवाज बनेंगी प्रेरणा
विशाखा ने कहा कि कछुए और खरगोश की कहानी जो हमें सिखाती हैं कि हमें जिंदगी में कभी रुकना नहीं चाहिए। पिंकी ने कहा कि न्यूट्रिशन यानी पोषण आहार को लेकर ध्यान देना होगा। जागरूक करने के लिए लोगों के बीच में नाटक के माध्यम से गेम्स के माध्यम से बात रखते हैं। वैशाली ने कहा कि कहानियां और जिंदगी अलग नहीं हो सकती। एक जिंदगी में कई किरदार होते हैं, जिंदगी बदलने से कहानी बदलती है।
 
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