राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र स्थित ओम नगर की शासकीय नवीन प्राथमिक शाला की बदहाल स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गुरुवार को कोलार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल का निरीक्षण कर वीडियो जारी किया। वीडियो में स्कूल की जर्जर इमारत, सीलन से भरी दीवारें, उखड़ा प्लास्टर, टूटे शौचालय और अव्यवस्थित परिसर नजर आ रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि स्कूल में वर्षों से बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, जबकि पहली से पांचवीं तक के करीब 70 बच्चों की पढ़ाई केवल एक शिक्षिका के भरोसे चल रही है।
बच्चों से बात की, स्कूल की समस्याएं सुनी
सुबह करीब 10:30 बजे कोलार ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल सिंह राठौड़ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल स्कूल पहुंचा। इस दौरान प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों और स्कूल की एकमात्र शिक्षिका से बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। प्रतिनिधिमंडल में सुजीत पांडा, शाहिद हुसैन, सुनील पाटिल, रवि चौधरी, आदि नागले और आनंद इंगोले भी मौजूद रहे।
वीडियो में सामने आई बदहाली
कांग्रेस की ओर से जारी वीडियो में स्कूल भवन की दीवारों और छत पर सीलन, कई जगह प्लास्टर उखड़ा हुआ और शौचालय जर्जर हालत में दिखाई दे रहे हैं। परिसर की सुरक्षा के लिए लगी जाली भी कई जगह से टूटी हुई है। कांग्रेस का दावा है कि स्कूल में बिजली का कनेक्शन नहीं है, पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं है और बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर भी उपलब्ध नहीं है। कई बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं।
70 बच्चों पर सिर्फ एक शिक्षिका
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, स्कूल की एकमात्र शिक्षिका ज्योति बरमैया ने बताया कि विद्यालय में पहली से पांचवीं तक करीब 70 विद्यार्थी हैं और सभी कक्षाओं की पढ़ाई उन्हें अकेले करानी पड़ती है। उन्होंने यह भी बताया कि अतिरिक्त शिक्षक, बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं के लिए कई बार जिला शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी। स्कूल में पानी की सुविधा नहीं होने पर पास की आशा कार्यकर्ता बच्चों के लिए पानी लाकर उपलब्ध कराती हैं।
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सरकार और विधायक पर साधा निशाना
कोलार ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल सिंह राठौड़ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भोपाल कलेक्टर से स्कूल का तत्काल निरीक्षण कर बिजली, पानी, अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति, फर्नीचर और भवन की मरम्मत कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2000 में स्थापित इस स्कूल की मौजूदा दुर्दशा के लिए प्रदेश सरकार और स्थानीय विधायक जिम्मेदार हैं। उनका कहना है कि जब राजधानी के सरकारी स्कूलों की यह स्थिति है, तो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।