14 जनवरी 2025 को शनि नवग्रह मंदिर त्रिवेणी, उज्जैन से सूर्य देव की सवारी निकाली जाएगी। सूर्य देव को पालकी में विराजमान कर उनके गर्भगृह से त्रिवेणी नदी तक ढोल-ताशों के साथ 108 बटुक ब्राह्मणों द्वारा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करते हुए ले जाया जाएगा। त्रिवेणी नदी पर आचमन और पूजा-अर्चना के बाद सूर्य देव को शनि मंदिर के भूमिगत गर्भगृह में विराजित किया जाएगा।
पालकी यात्रा
सुबह 11.45 बजे शनि त्रिवेणी मंदिर से शुरू होकर सूर्य देव की सवारी त्रिवेणी नदी तक जाएगी। बटुक ब्राह्मण विभिन्न ग्रहों की ध्वजाओं के साथ सवारी में शामिल होंगे।
पिता-पुत्र मिलन और पूजन
कार्यक्रम के दौरान 12.30 बजे दोपहर को बटुक ब्राह्मण पुत्रों के रूप में अपने पिता का पाद पूजन करेंगे।
यज्ञ और मंत्रोच्चार
पिता-पुत्र के रिश्तों में मधुरता लाने के लिए सूर्य और शनि मंत्रों के साथ यज्ञ किया जाएगा।
भोजन प्रसादी
दोपहर 2 बजे कार्यक्रम का समापन होगा, इसके बाद प्रसाद वितरण होगा।
संदेश और महत्व
गुरुजी ने बताया कि मकर संक्रांति केवल दान और उपासना का पर्व नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में मिठास और पारस्परिक समझ बढ़ाने का भी समय है। पिता-पुत्र का यह पर्व संदेश देता है कि धन के साथ-साथ समय का दान भी रिश्तों को संवारने में अहम भूमिका निभाता है।