बंडा में जहरीली शराब से मौतों के मामले में सपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका दावा है कि पार्टी ने पांच महीने में छह ज्ञापन देकर अवैध शराब की बिक्री रोकने की चेतावनी दी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। सपा ने मृतकों की संख्या 50 तक पहुंचने का दावा किया है, जबकि प्रशासन ने 22 मौतों की पुष्टि की है।
सागर जिले केबंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर समाजवादी पार्टी ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। सपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अवैध और जहरीली शराब की बिक्री को लेकर प्रशासन को लगातार आगाह किया गया, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि पार्टी ने अप्रैल से अब तक पांच महीने में छह ज्ञापन प्रशासन को सौंपे थे।
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पांच महीने में छह बार दी गई चेतावनी
डॉ. यादव ने सागर में पत्रकारों के सामने ज्ञापनों की प्रतियां रखते हुए कहा कि बंडा क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की शिकायतें अप्रैल से ही प्रशासन तक पहुंचाई जा रही थीं। ज्ञापनों में अवैध शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। सपा प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, प्रशासन को यह भी बताया गया था कि क्षेत्र में बिक रही शराब लोगों की जान के लिए खतरा बन सकती है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अब जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
प्रशासन 22 मौतें बता रहा, सपा का दावा 50 तक
सपा ने जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या को लेकर प्रशासन के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए हैं। डॉ. यादव ने दावा किया कि मृतकों की संख्या 50 तक पहुंच चुकी है, जबकि प्रशासन की ओर से फिलहाल 22 मौतों की पुष्टि की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पोस्टमार्टम के बिना ही अंतिम संस्कार किए जाने से मौतों की वास्तविक संख्या सामने नहीं आ पा रही है। हालांकि, सपा के 50 मौतों के दावे और पोस्टमार्टम नहीं होने के आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
कलेक्टर-एसपी समेत अधिकारियों की भूमिका जांचने की मांग
समाजवादी पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। पार्टी के मुताबिक सागर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, बंडा एसडीएम सहित उन सभी अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए, जिन्हें अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें और ज्ञापन दिए गए थे। सपा का आरोप है कि यदि प्रशासन ने शुरुआती शिकायतों को गंभीरता से लिया होता और अवैध शराब के कारोबार पर समय रहते लगाम लगाई होती तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। पार्टी ने सवाल उठाया कि बार-बार शिकायत और चेतावनी मिलने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की गई।